Tuesday, March 3, 2026
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57 नए साइबर थाने, 75 जिलों में यूनिट्स, 18 लैब्स: योगी सरकार में यूपी की फॉरेंसिक क्रांति, चल रहा अंतरराष्ट्रीय समिट

राज्य भर में 98 स्थानों पर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं, जिनमें नौ STF इकाइयाँ, एक ATS इकाई और 12 GRP इकाइयाँ शामिल हैं। अब तक 4.14 लाख से अधिक फिंगरप्रिंट का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

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सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान (UPSIFS), लखनऊ में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान संगोष्ठी का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन UPSIFS की तीसरी स्थापना दिवस पर आयोजित किया गया है और इसमें भारत तथा विदेशों से आए 100 से अधिक फॉरेंसिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल हुए।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संगोष्ठी के महत्व और आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इसके महत्व को प्राचीन भारत के ज्ञान से जोड़ा। उन्होंने कहा, “आज की दुनिया में फॉरेंसिक विज्ञान जरूरी है। यह हमें साइबर खतरों से बचाता है और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करता है। आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मदद से हम इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। इस संगोष्ठी में होने वाली चर्चाएँ हमें दिशा देंगी और समाज को वर्तमान तथा भविष्य की चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपटने में मदद करेंगी।”

मुख्यमंत्री ने नव स्थापित ड्रोन और डीएनए प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया और 75 जिलों के लिए फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाई।

फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत करना

पिछले आठ वर्षों में योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। इस विस्तार से अपराध के खिलाफ लड़ाई तेज हुई है, न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा बढ़ा है और युवाओं के लिए नए करियर अवसर खुले हैं।

उन्नत तकनीकों को अपनाकर, प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाकर और युवाओं को फॉरेंसिक विज्ञान में प्रशिक्षित कर सरकार एक सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत उत्तर प्रदेश का निर्माण कर रही है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले नमूने इकट्ठा करने और रिपोर्ट आने में दशकों लग जाते थे। तब तक अपराधियों को सजा नहीं मिलती थी, कभी-कभी उन्हें सजा मिलती ही नहीं थी। लेकिन अपराध के प्रति हमारी ज़ीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करने के लिए फॉरेंसिक ढांचे को अपग्रेड करना ज़रूरी है।”

2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ चार फॉरेंसिक प्रयोगशालाएँ थीं – लखनऊ, वाराणसी, आगरा और गाज़ियाबाद में। आज राज्य में 12 सक्रिय लैब हैं और झांसी, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर, बरेली, गोंडा, अलीगढ़ और मुरादाबाद में नई सुविधाएँ स्थापित की गई हैं।

अयोध्या, बस्ती, बांदा, आज़मगढ़, मिर्जापुर और सहारनपुर में छह और लैब स्थापित की जा रही हैं। इनके शुरू होने के बाद अपराध जांच और सबूत जुटाने की प्रक्रिया और मज़बूत होगी।

UPSIFS: प्रशिक्षण और शोध का प्रमुख केंद्र

उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान (UPSIFS) की स्थापना राज्य के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हुई है। यह संस्थान तेजी से शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध का प्रमुख केंद्र बन गया है।

यहाँ पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षु वैज्ञानिक और विद्यार्थी अत्याधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। संस्थान उन्नत शोध भी कर रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फॉरेंसिक उत्कृष्टता का केंद्र बनाने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों ने बताया कि जटिल मामलों, खासकर साइबर अपराध में, फॉरेंसिक साक्ष्य अब सजा दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

फिंगरप्रिंट डिजिटलीकरण में यूपी अव्वल

उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) के तहत अपनी फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली को आधुनिक बनाया है।

राज्य भर में 98 स्थानों पर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं, जिनमें नौ STF इकाइयाँ, एक ATS इकाई और 12 GRP इकाइयाँ शामिल हैं। अब तक 4.14 लाख से अधिक फिंगरप्रिंट का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इससे अपराधियों की पहचान करने, पुराने अपराधियों का पता लगाने और अज्ञात शवों की पहचान करने में मदद मिली है।

इस उपलब्धि के कारण उत्तर प्रदेश ने NCRB के राष्ट्रीय डैशबोर्ड में फिंगरप्रिंट डिजिटलीकरण में पहला स्थान प्राप्त किया।

साइबर अपराध रोकथाम में नए कदम

योगी सरकार ने साइबर अपराध पर विशेष ध्यान दिया है, जो आज पूरी दुनिया में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।

2023 में राज्य में 57 नए साइबर क्राइम थाने स्थापित किए गए। इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, वित्तीय घोटालों और साइबर अपराधों से निपटने की क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से अब साइबर अपराध मामलों को अधिक तेजी और सटीकता से सुलझाया जा रहा है, जिससे सजा दिलाने की दर बढ़ी है।

कानून, तकनीक और न्याय का मेल

अधिकारियों ने बताया कि नए आपराधिक कानून – भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) – ने जांच में फॉरेंसिक विज्ञान के उपयोग के नए अवसर खोले हैं।

विशेष रूप से प्रशिक्षित फॉरेंसिक वैज्ञानिकों को विभिन्न इकाइयों में तैनात किया जा रहा है ताकि साक्ष्य एकत्रण मजबूत हो और न्याय तेजी से मिल सके। इनकी भूमिका खासकर साइबर अपराध, आतंकवाद से जुड़े मामलों और अज्ञात शवों की पहचान में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

सुरक्षित और सशक्त उत्तर प्रदेश की ओर

अंतरराष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान संगोष्ठी राज्य की आधुनिक और वैज्ञानिक पुलिसिंग ढाँचे की ओर यात्रा का एक और महत्वपूर्ण कदम है। दुनियाभर के विशेषज्ञ यहाँ ज्ञान साझा कर रहे हैं और सरकार लगातार बुनियादी ढाँचे में निवेश कर रही है, जिससे उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बन रहा है।

फॉरेंसिक सुविधाओं का विस्तार, आपराधिक रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, साइबर अपराध थानों की स्थापना और युवाओं को उन्नत वैज्ञानिक पद्धतियों में प्रशिक्षित करके योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अपराधियों को सख्त सजा मिले और नागरिकों को अधिक सुरक्षा का अनुभव हो।

एक अधिकारी के शब्दों में: “फॉरेंसिक विज्ञान अब केवल अपराध सुलझाने तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में यह साइबर अपराधियों के खिलाफ हथियार, न्याय का साधन और युवाओं के लिए सुनहरे करियर का अवसर बन चुका है।”

UP4India Desk
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