सरकार आज संसद में तीन विधेयक ले कर आई, जिनके जरिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री का पद स्वतः खत्म हो जाएगा, अगर वह गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है। गृह मंत्री अमित शाह इन विधेयकों को लोकसभा में पेश किया। इनमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीनों विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने की सिफारिश की। इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष की ओर से बिल की कॉपी फाड़कर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर फेंकी गई।
क्यों लाए जा रहे ये विधेयक?
सरकार का तर्क है कि अभी संविधान या वर्तमान कानूनों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि केवल गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर किसी मंत्री को हटाया जा सके। अभी केवल सजा होने पर सांसद या विधायक अपनी सदस्यता खोते हैं। कई बार मंत्री और मुख्यमंत्री गिरफ्तारी के बावजूद पद पर बने रहते हैं, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ता है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव राजनीति को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और नैतिक बनाएगा।
संविधान का 130वां संशोधन क्या कहता है?
अनुच्छेद 75 (केंद्र सरकार – प्रधानमंत्री और मंत्रीमंडल)
यदि कोई केंद्रीय मंत्री लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है, तो राष्ट्रपति उसे प्रधानमंत्री की सलाह पर पद से हटा देंगे। लेकिन अगर प्रधानमंत्री 31वें दिन तक कोई सलाह नहीं देते हैं, तब भी मंत्री का पद अपने आप खत्म हो जाएगा।प्रधानमंत्री पर भी यही नियम लागू होगा। यदि प्रधानमंत्री खुद 30 दिन तक जेल में रहते हैं और 31वें दिन तक इस्तीफा नहीं देते, तो उनका पद स्वतः समाप्त माना जाएगा।
अनुच्छेद 164 (राज्य सरकार – मुख्यमंत्री और मंत्रीमंडल)
राज्य मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के लिए भी वही नियम है। अगर कोई मंत्री 30 दिन तक जेल में रहता है, तो राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे हटा देंगे। यदि मुख्यमंत्री सलाह नहीं देते, तो 31वें दिन से उसका पद अपने आप चला जाएगा। यदि मुख्यमंत्री 30 दिन तक जेल में रहते हैं और इस्तीफा नहीं देते, तो उनका पद भी अपने आप खत्म हो जाएगा।
अनुच्छेद 239AA (दिल्ली सरकार – मुख्यमंत्री और मंत्रीमंडल)
दिल्ली के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी यही प्रावधान लागू होगा। कोई मंत्री 30 दिन तक जेल में रहे तो राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री की सलाह पर उसे हटा देंगे। यदि सलाह नहीं दी जाती, तो 31वें दिन से पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। मुख्यमंत्री यदि 30 दिन तक जेल में रहें और इस्तीफा न दें, तो उनका पद अपने आप खत्म हो जाएगा।
इसका मतलब यह है कि यदि पीएम या सीएम जेल में 30 दिन पूरे कर लेते हैं, तो 31वें दिन उन्हें इस्तीफा देना होगा। यदि इस्तीफा नहीं दिया तो पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
क्या है केंद्र शासित संशोधन विधेयक?
1963 के “केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम” में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। नए संशोधन में साफ किया गया है कि यदि कोई मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसका पद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
समिति के पास जाएंगे विधेयक
सरकार और गृह मंत्री इन विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने का प्रस्ताव की सिफारिश की। समिति में दोनों सदनों के सदस्य होंगे और वहीं इन विधेयकों पर विस्तार से चर्चा होगी।
कांग्रेस पार्टी ने इन विधेयकों का जोरदार विरोध किया है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इसका इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को कमजोर करने के लिए करेगी। उन्होंने कहा, “बिना दोष साबित हुए मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाना लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ है। यह कानून खासकर विपक्षी राज्यों में सरकारों को अस्थिर करने का जरिया बनेगा।”
राजनीतिक तूफ़ान तय
इन विधेयकों के आने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे राजनीति साफ-सुथरी होगी और भ्रष्टाचार करने वालों को तुरंत कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। जबकि विरोधियों का कहना है कि केंद्र सरकार एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाएगी।
अब नजर इस बात पर है कि संसद में इन विधेयकों पर कितनी बहस होती है और कितना विरोध सामने आता है। यह तय है कि अगर ये विधेयक पास हो जाते हैं तो भारतीय राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ेगा।
