Tuesday, March 3, 2026
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झूठे रेप केस से खड़ा किया ₹1500 करोड़ का साम्राज्य, गैंग में मिस यूपी भी करती थी काम: जाने पूरी कहानी 

अखिलेश दुबे कभी अदालत में खड़ा नहीं हुआ। मगर अपने दफ्तर में वह खुद को जज की कुर्सी पर बिठा लेता। वहीं बड़े केसों की लिखा-पढ़ी, अफसरों की जांच की फाइलें और फैसला तय होता था। तीन दशक तक कानपुर में उसकी बादशाहत बनी रही।

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झूठे रेप केस दर्ज कराने का खेल… और उसी खेल के दम पर अरबों की संपत्ति पर कब्ज़ा। यह कहानी है उस वकील अखिलेश दुबे की, जिसने कभी कोर्ट में बहस तक नहीं की, मगर अपनी चालाकियों और पुलिस से करीबी के दम पर कानपुर में अपना 1500 करोड़ के अपर का साम्राज्य खड़ा कर लिया। SIT की जांच में अब यह पूरा जाल धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रहा है।

लड़की का कबूलनामा

बर्रा थाने में भाजपा नेता रवि सतीजा पर झूठा केस दर्ज कराने वाली लड़की ने पुलिस के सामने हैरान कर देने वाला स्वीकारोक्ति पत्र दिया है।

उसने बताया कि वकील टोनू यादव ने पैसे का लालच देकर उसे अखिलेश दुबे के पास पहुंचाया। वहीं से उसने झूठी रिपोर्ट लिखवाई। एक केस से 50 हजार से दो लाख तक की कमाई होती थी। लड़की ने बताया कि पुलिस की तरफ से उन्हें पूरा संरक्षण मिलता था।

लड़की का कहना है कि कॉलोनी की अन्य महिलाएं भी इसमें शामिल थीं। SIT की जांच शुरू होते ही टोनू ने बस्ती की दस से ज्यादा महिलाओं को छत्तीसगढ़ भिजवा दिया।

गैंग में मिस यूपी बनी ‘विषकन्या’

जांच में सामने आया है कि गिरोह में मिस यूपी रह चुकी युवती को भी फंसा लिया गया था। उसे करियर और पैसे का सपना दिखाया गया।

धीरे-धीरे वह गैंग की सबसे खास बन गई और नया नाम मिला- विषकन्या।

वह अखिलेश के कैंपस में ही रहने लगी और एक राजनीतिक संगठन में महिला विंग की जिलाध्यक्ष तक बना दी गई।

उसने सबसे पहले कार्यालय के सामने के एक होटल मालिक पर झूठा रेप केस दर्ज कराया। समझौते के नाम पर 2.50 करोड़ रुपए वसूल लिए। आज वही होटल मालिक FIR दर्ज करा चुका है, मगर युवती गायब हो चुकी है।

पुलिस से गहरे रिश्ते

अखिलेश दुबे का सफर फर्द (जमीन का रिकॉर्ड) लिखने से शुरू हुआ। इसी वजह से उसकी मुलाकात थाने-स्तर के अफसरों से लेकर बड़े पुलिस अधिकारियों तक हुई।

धीरे-धीरे उसने उनसे गहरी नजदीकियां बना लीं। यही उसकी असली ताकत बनी। इसी का फायदा उठाकर उसने झूठे रेप केस दर्ज कराए, पीड़ितों की जमीन हड़पी और मोटी रकम वसूली।

SIT की रिपोर्ट में ऐसे 54 से अधिक मामले सामने आए हैं। अनुमान है कि दुबे के कब्जे वाली ज़मीन की कीमत 1500 करोड़ से ज्यादा है।

अपनी ही ‘कचहरी’

अखिलेश दुबे कभी अदालत में खड़ा नहीं हुआ। मगर अपने दफ्तर में वह खुद को जज की कुर्सी पर बिठा लेता।

वहीं बड़े केसों की लिखा-पढ़ी, अफसरों की जांच की फाइलें और फैसला तय होता था। तीन दशक तक कानपुर में उसकी बादशाहत बनी रही।

लोग उसका नाम सुनते ही डर जाते थे और अदालत तक लड़ाई ले जाने के बजाय समझौते पर मजबूर हो जाते थे।

SIT और पुलिस की कार्रवाई

पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार का कहना है कि अब तक मिली रिपोर्ट से साफ है- दुबे का सबसे बड़ा हथियार झूठे रेप केस ही थे।

वे कहते हैं कि “अब डरने की जरूरत नहीं है। पीड़ित सामने आएं और रिपोर्ट दर्ज कराएं, तभी कड़ी कार्रवाई हो सकेगी।”

SIT अब मिस यूपी उर्फ विषकन्या सहित फरार महिलाओं की तलाश कर रही है। साथ ही दुबे की जमीन साम्राज्य की एक-एक परत खोलने में जुटी है।

यह मामला सिर्फ एक वकील का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का प्रतीक है जिसमें कानून का दुरुपयोग कर गरीबों और आम लोगों को परेशान किया गया। अब देखना होगा कि जांच के बाद दुबे की पकड़ कितनी गहराई तक ढहाई जा सकती है।

UP4India Desk
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