बरेली में तीन बांग्लादेशी महिलाएं फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाकर कई साल से रह रही थीं। प्रेमनगर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इन महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इन पर फर्जी पासपोर्ट, दस्तावेज़ बनाने और विदेश यात्रा करने का आरोप है। पुलिस ने इनके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
कैसे हुआ खुलासा?
शहर के मौलानगर में मुनारा बी नाम की महिला रहती थी। वह असल में बांग्लादेश के जिले जेस्सोर, खुलना की निवासी है। मुनारा बी 2011 में अवैध रूप से भारत आई थी। यहाँ बिलाल मस्जिद के पास उसने फर्जी पहचान पत्र और पासपोर्ट बनवा लिया। 2012 में मुनारा ने अपनी बहन सायरा बानो के नाम से भी एक फर्जी पासपोर्ट बनवाया। इस पासपोर्ट में फोटो मुनारा का ही था, लेकिन नाम-पता सायरा का लिखवाया। इस फर्जी पासपोर्ट के जरिए मुनारा ने कई बार बांग्लादेश, दुबई और अन्य खाड़ी देशों की यात्रा की।
पासपोर्ट की वैधता खत्म होने पर उसने कुवैत स्थित भारतीय दूतावास से नया पासपोर्ट बनवा लिया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को जब इसकी गुप्त सूचना मिली तो प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। जांच में पता चला कि मुनारा की बहनें सायरा और तस्लीमा भी हाफिजगंज इलाके में फर्जी दस्तावेज बनाकर भारतीय बनकर रह रही हैं।
तीनों बहनों की कहानी
मुनारा बी की उम्र 65 साल है। उसका पति अब इस दुनिया में नहीं है। वह बरसों पहले भारत आई थी और यहीं की नागरिक बन गई थी। बहन सायरा की उम्र 50 साल है, उसके पति की भी मौत हो चुकी है। सायरा के तीन बेटे, दो बेटियां हैं और परिवार सब्जी बेचने का काम करता है। तीसरी बहन तस्लीमा (45) के पति मजदूरी करते हैं। तस्लीमा के छह बेटे और एक बेटी है।
इन बहनों के पति स्थानीय हैं, जिससे इनका भारतीय परिवार जैसा दिखता था। मुनारा का भाई भी ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता है। उसने बताया कि परिवार बंगाल के रास्ते पहले कोलकाता आया था, फिर बरेली में बस गया।
भारत की योजनाओं का भी ले रहीं लाभ
पुलिस की जाँच में अभी तक यह भी सामने आ चुका है कि तीनों महिलाओं ने भारतीय दस्तावेजों से भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार की संचालित कई योजनाओं का भी लाभ लिया है। उनके पास राशन कार्ड आदि भी पुलिस को मिले हैं। पुलिस इस प्रकरण में और भी चीजों को खंगाल रही है।
जिससे इस पूरे प्रकरण की कड़ी को जोड़ा जा सके। सवाल इस बात का है कि इतने लंबे समय से यह महिलाएं बरेली में रह रही थीं, योजनाओं का लाभ ले रहीं थीं लेकिन किसी को उन पर शक तक नहीं हुआ।
पुलिस कार्रवाई और एजेंसियों की जांच
पुलिस के पास जब पक्की सूचना आई, तब थानाध्यक्ष पवन कुमार की टीम ने हाफिजगंज के बाजार मोहल्ले में दबिश दी। वहाँ से सायरा और तस्लीमा को हिरासत में ले लिया गया। पड़ोसियों को भी उनके फर्जीवाड़े की कोई भनक नहीं थी। पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों बहनें सालों से फर्जी कागज़ात से भारत में रह रही थीं।
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मुनारा बी की बांग्लादेशी नागरिकता पक्की हुई है। उसकी दोनों बहनों के कागज भी जाली हैं। पुलिस और एजेंसियां अब इनके नेटवर्क और मददगारों का पता लगाने में जुटी हैं।
तीनों महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। पुलिस का मानना है कि इनके पीछे बड़ा गिरोह काम कर सकता है। जांच के बाद और गिरफ्तारियां भी सम्भव हैं। अफसरों के मुताबिक, जल्द ही पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। फिलहाल, महिलाएं पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ चल रही है।




