उत्तर प्रदेश में ‘घुमन्तु जनजाति दिवस’ न केवल ऐतिहासिक महत्त्व का दिन है, बल्कि समाज के सबसे हाशिये पर रह रहे विमुक्त, घुमन्तु और अर्द्ध घुमन्तु जनजातियों के अधिकार, उनके सशक्तिकरण और कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. योगी सरकार द्वारा इन समुदायों के शिक्षा, आवास, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है.
क्या है ‘घुमन्तु जनजाति दिवस’?
‘घुमन्तु जनजाति दिवस’ हर वर्ष 31 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डीनोटिफाइड, नोमैडिक और सेमी नोमैडिक जनजातियों (डीएनटी) के अधिकारों की ओर समाज का ध्यान खींचना और इन्हें सामाजिक समरसता दिलाना है. भारतीय उपमहाद्वीप की इन जातियों को अंग्रेजों ने वर्ष 1871 में ‘जन्मजात अपराधी’ की श्रेणी में डालकर दशकों तक जेलनुमा बस्तियों में रहना पड़ा। आजादी के बाद 1952 में ‘क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट’ हटाया गया, जिसके बाद इनका सामाजिक पुनर्वास शुरू हुआ. यह दिवस सामाजिक न्याय, बराबरी, और जनजागरूकता का प्रतीक है।
योगी सरकार का ट्राइबल्स के लिए विजन और संकल्प
योगी आदित्यनाथ सरकार का मुख्य फोकस इन हाशिए की जनजातियों को “विकास की मुख्यधारा” में जोड़ना है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के दृष्टिकोण के साथ समाज कल्याण विभाग इन समुदायों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आजीविका के लिए लगातार योजनाएं संचालित कर रहा है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में प्रदेश में घुमन्तु जातियों के लिए एक विशेष बोर्ड बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इस बोर्ड के माध्यम से सम्पेरा, जोगी, बंजारा, नट, कंजड सहित सभी घुमन्तु जातियों को संगठित किया जाएगा। साथ ही, इन जातियों के लिए जमीन के पट्टे और मकान उपलब्ध कराए जाएंगे तथा इनके रहने के लिए कॉलोनियाँ बनाई जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि इन समुदायों के लिए वाहन जैसी सुविधाओं का प्रावधान भी किया जाना चाहिए, जिससे वे बेहतर जीवन यापन कर सकें।
शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कदम
- प्रदेश में 9 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित हैं, जहाँ कक्षा 6 से 12 तक विमुक्त जाति के बच्चों को शिक्षित किया जा रहा है.
- प्रयागराज और बालागंज में आवासीय विद्यालय अनुदान पर संचालित हैं.
- 101 आश्रम पद्धति विद्यालय के साथ-साथ कई छात्रावास भी संचालित किए जा रहे हैं.
- विद्यार्थियों को भोजन, पुस्तकें, स्कूल ड्रेस जैसे ज़रूरी संसाधन मुफ्त दिए जा रहे हैं.
आवास एवं भूमि का विशेष प्रावधान
- कानपुर (कल्याणपुर), लखीमपुर खीरी (साहबगंज), मुरादाबाद (फजलपुर) में स्थायी निवास व कृषि योग्य भूमि के पट्टे आवंटित किए गए हैं.
- 264 अनुसूचित जाति छात्रावास विमुक्त छात्रों के लिए खुले हैं.
- प्रधानमंत्री आवास योजना में इन जातियों को प्राथमिकता दी जा रही है.
रोजगार और आजीविका में बदलाव
- मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत स्वरोजगार एवं कौशल विकास प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं.
- आईटीआई, फिटर-फेब्रीकेशन ट्रेड, आदि क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण का लाभ दिया गया है.
- बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.
स्वास्थ्य एवं सामाजिक सशक्तिकरण
- स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और प्रचार-प्रसार इन समुदायों को सशक्त बनाने के लिए किया जा रहा है.
- विशेष शिविर लगाकर वोटर आईडी, आधार, जाति प्रमाण पत्र जैसी मूल सुविधाएं इनके लिये उपलब्ध कराई जा रही हैं.
सामाजिक समरसता और सरकारी प्रतिबद्धता
विमुक्त व घुमन्तु जातियों को सामाजिक न्याय, समानता, व गरिमा के साथ मुख्यधारा में शामिल करना योगी सरकार की प्राथमिकता है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में घुमन्तु जनजातियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए योजनाओं की श्रृंखला चलाई जा रही है। मंत्री असीम अरुण ने भी इसे समाज के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और दृढ़ निश्चय का प्रमाण माना है.
सशक्तिकरण की ओर बढ़ता जनजाति समाज
विमुक्त और घुमन्तु जनजाति दिवस के अवसर पर योगी सरकार के प्रयास इन समुदायों के लिए नई आशा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुके हैं. शिक्षा, स्वस्थ्य, आवास, और आर्थिक मदद के साथ-साथ इनके अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार लगातार विकासोन्मुख योजनाएं बना रही है। यह पहल उत्तर प्रदेश को सशक्त, समावेशी और समरसता आधारित समाज की संकल्पना की ओर ले जाती है।




