अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में पाकिस्तान की सीमा के पास रविवार रात करीब 11:47 बजे एक तीव्र भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर लगभग 6 मापी गई। इसी प्रांत में 20 मिनट बाद 4.5 तीव्रता का एक और शॉक आया। भूकंप का केन्द्र जलालाबाद के पास लगभग 8 किलोमीटर की गहराई पर था। भूकंप के झटके इतनी गंभीरता के थे कि आसपास के कई गाँवों की दहलीजें धराशायी हो गईं। इस हादसे में अब तक 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2500 से अधिक घायल हैं। कई घायल मरीजों को हवाई अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है।
भारत और वैश्विक सहानुभूति
भारत ने अफगानिस्तान में आई भूकंप आपदा में अपनी पूर्ण सहानुभूति और समर्थन व्यक्त किया है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी से बातचीत करके मृतकों के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। भारत ने पहले ही काबुल में 1000 परिवारों के लिए तंबू भेजे हैं और 15 टन भोजन सामग्री कुणार प्रांत तक पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा, भारत से अगले दिनों और राहत सामग्री भेजने की योजना बनाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता देने का आश्वासन दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी संयुक्त राष्ट्र सहित कई संस्थाओं ने अफगानिस्तान के लिए आपातकालीन सहायता का भरोसा जताया है। भारत इस कठिन समय में अफगानिस्तान के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘अफगानिस्तान में भूकंप के कारण हुई जान-माल की हानि से मुझे गहरा दुख हुआ है। इस कठिन घड़ी में हमारी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। हम घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं। भारत प्रभावित लोगों को हर संभव मानवीय सहायता और राहत प्रदान करने के लिए तैयार है।’
भूकंप की खासियत और कारण
अफगानिस्तान भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है क्योंकि यहां सात तकनीकी प्लेटें आपस में टकराती हैं। यह टकराव जब ज़्यादा दबाव पैदा करता है तो प्लेटों के टूटने से जमीन के अंदर ऊर्जा निकलती है, जिससे भूकंप आता है। भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) वह स्थान होता है जहां सबसे अधिक कंपन होता है। यहां से दूर जाने पर भूकंप का असर कम होता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की गति 1 से 9 तक मापी जाती है, जो भूकंप की ऊर्जा की तीव्रता दर्शाती है
अफगानिस्तान में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
पिछले एक महीने में अफगानिस्तान में पांच बार भूकंप आ चुका है। यह क्षेत्र भू-तकनीकी दृष्टि से बेहद सक्रिय है और यहां की भौगोलिक बनावट और प्लेट टेक्टॉनिक्स के कारण यह बार-बार भूकंपीय गतिविधियों का केंद्र बनता है। विशेष रूप से नांगरहार और कुनार प्रांत में इंसान की सुरक्षा खतरे में रहती है क्योंकि यहां के अधिकतर घर मिट्टी और लकड़ी से बने हैं, जो भूकंप की तीव्रता सहन नहीं कर पाते।
इस भूकंप से हुई तबाही अफगानिस्तान के लिए एक बड़ा मानवतावादी संकट बन चुका है और राहत एवं पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अत्यंत आवश्यकता है। भारत सहित कई देश अफगानिस्तान की मदद के लिए तैयार हैं और राहत कार्य जारी है।




