IAS अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। सिक्किम कैडर के 2005 बैच के अफसर आंजनेय को केंद्र सरकार ने सातवीं बार उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति बढ़ाकर एक साल का एक्सटेंशन दे दिया है। अब वह अगस्त 2026 तक यूपी में ही तैनात रहेंगे। सवाल है कि आखिर कौन हैं यह अफसर और इनका क्या योगदान रहा है कि सरकार इनको सेवा निविर्त नहीं करना चाहती।
यूपी में सपा सरकार ने बुलाया, भाजपा ने भी बनाया भरोसेमंद
आंजनेय कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के सलाहादाबाद गांव के रहने वाले हैं। सिक्किम कैडर मिलने के बाद उन्होंने लगभग आठ साल वहीं काम किया। लेकिन 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की सिफारिश पर उन्हें यूपी बुलाया। 16 फरवरी 2015 को उन्होंने उत्तर प्रदेश में कार्यभार संभाला और जल्द ही सिंचाई विभाग के विशेष सचिव बनाए गए। इसके बाद उन्हें शारदा सहायक प्रोजेक्ट का चार्ज भी मिला और 2016 में बुलंदशहर का डीएम बना दिया गया।
मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो माना जा रहा था कि आंजनेय को सपा सरकार का अफसर मानकर हाशिये पर डाल दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्हें एडिशनल कमिश्नर, जीएसटी बनाया गया, फिर फतेहपुर के डीएम और उसके बाद 2019 में रामपुर का जिलाधिकारी नियुक्त कर दिया गया। यहीं से उनकी छवि बदलकर योगी सरकार के भरोसेमंद अफसर के रूप में उभर आई। यह दर्शाता है कि आंजनेय कुमार सिंह एक शुद्ध प्रशासनिक व्यक्ति है और वो काम सरकारों को देख कर नहीं बल्कि राज्य और लोगो के हित को ध्यान में रख कर करते हैं।
रामपुर में आजम खान पर बड़ी कार्रवाई
रामपुर के डीएम रहते हुए आंजनेय कुमार सिंह ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के खिलाफ सख्त कदम उठाए। उन्होंने सड़क पर बने अवैध उर्दू गेट को गिरवाया, जौहर यूनिवर्सिटी की चारदीवारी में कैद सरकारी सबस्टेशन को मुक्त कराया और यूनानी चिकित्सालय की जमीन पर कब्जे को हटवाया। इन कार्रवाइयों से आजम खान बौखला गए और चुनावी भाषणों में उन्होंने आंजनेय पर विवादित बयान दिए। यही भाषण बाद में उनके खिलाफ केस का आधार बने और उन्हें तीन साल की सजा मिली।
यहीं से आजम खान के खिलाफ मुकदमों की झड़ी लग गई। डीएम आंजनेय की रिपोर्ट पर उनके खिलाफ करीब 98 केस दर्ज हुए। उन्हें भू-माफिया घोषित किया गया और जौहर यूनिवर्सिटी की 172 एकड़ सरकारी जमीन वापस ली गई। इतना ही नहीं, आजम खान के बेटे अब्दुल्ला की विधायकी भी उनके आदेश पर रद्द हुई जब जांच में सामने आया कि उन्होंने फर्जी उम्र का प्रमाण पत्र लगाया था।
मुरादाबाद कमिश्नर और सातवीं बार एक्सटेंशन
रामपुर में दो साल के कार्यकाल के बाद आंजनेय कुमार सिंह का प्रमोशन हुआ और मार्च 2021 में उन्हें मुरादाबाद का मंडलायुक्त बना दिया गया। यहां वे 14 अगस्त 2025 तक पद पर रहे।
कार्यकाल पूरा होने पर उन्होंने चार्ज डीएम को सौंप दिया और छुट्टी पर चले गए। लेकिन यूपी सरकार की सिफारिश पर केंद्र ने दो दिन के भीतर ही उनका प्रतिनियुक्ति विस्तार मंजूर कर लिया।
अब उन्हें सातवीं बार एक्सटेंशन मिला है। नियमों के अनुसार किसी भी अफसर को अधिकतम पांच साल तक ही प्रतिनियुक्ति पर रखा जा सकता है, लेकिन आंजनेय पिछले दस साल से यूपी में सेवा दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने विशेष परिस्थितियों में बार-बार उनके कार्यकाल को बढ़ाया है।
योगी के प्रिय अफसर
दिलचस्प यह है कि आंजनेय कुमार सिंह उन कुछ IAS अफसरों में हैं, जिन पर अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ दोनों ने भरोसा जताया। अखिलेश सरकार में बुलंदशहर का डीएम बनाकर उन्हें अहम जिम्मेदारी दी गई, तो योगी सरकार ने रामपुर और मुरादाबाद जैसे संवेदनशील जिलों की कमान सौंप दी। माना जाता है कि उनकी कड़ी कार्यशैली और ईमानदारी की वजह से दोनों सरकारें उन्हें अपने पास रखना चाहती थीं।
सातवीं बार सेवा विस्तार मिलने के बाद अब साफ है कि आंजनेय कुमार सिंह यूपी में ही नई जिम्मेदारी संभालेंगे। वे अब तक जिस तरह विवादित मामलों में सीधे और कठोर फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं, उसी अंदाज में उनकी नई पोस्टिंग भी महत्वपूर्ण होगी। सपा शासन से लेकर भाजपा शासन तक लगातार भरोसेमंद बने रहना बताता है कि आंजनेय सिर्फ अफसर नहीं, बल्कि यूपी की नौकरशाही में एक मजबूत पहचान बन चुके हैं।




