उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार (3 सितंबर) को समाजवादी पार्टी (सपा) महिला मोर्चा का विरोध-प्रदर्शन अचानक सुर्खियों में आ गया। सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने भाजपा विधायक केतकी सिंह के आवास पर पहुंचकर विरोध जताया। प्रदर्शन का नेतृत्व नेहा यादव कर रही थीं, जो हाथ में नल लेकर सरकार पर जनता की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए पहुँचीं। लेकिन प्रदर्शन उस समय नाटकीय मोड़ ले बैठा जब विधायक की नाबालिग बेटी विभावरी सिंह सामने आ गईं और उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं को करारा जवाब दिया।
विभावरी सिंह का बेबाक बयान
मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विभावरी ने कहा,
“मेरी माँ इस समय यहाँ नहीं हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि आप लोग एक 16 साल की लड़की को डराना चाहते हैं। अगर आपने मुझ पर उंगली भी उठाई, तो मेरी माँ बीच से फाड़ देंगी।”
यह बयान न केवल वहाँ मौजूद लोगों के लिए अचंभे का विषय बना बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। कुछ लोग उनकी निर्भीकता की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ विरोधी खेमे ने इसे सत्ता के असर में पली-बढ़ी भाषा करार दिया।
पुलिस की सख्त कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने लगी तो पुलिस ने हस्तक्षेप किया। महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को बलपूर्वक हिरासत में लिया गया। कई महिलाओं को खींचकर गाड़ियों में बैठाया गया और इको गार्डन भेज दिया गया। गिरफ्तारी के दौरान भी कार्यकर्ता नारे लगाते रहे और सरकार पर लोकतंत्र की आवाज दबाने का आरोप लगाते रहे।
घटनाक्रम के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। भाजपा समर्थक विभावरी के बयान को साहस और बेबाकी कह रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे सत्ता के अहंकार का प्रतीक बता रहा है।
केतकी सिंह का हमला अखिलेश पर
इसी बीच, बलिया की बांसडीह विधानसभा से भाजपा विधायक केतकी सिंह ने भी समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश पहले मुख्यमंत्री आवास छोड़ते समय गायब हुए सरकारी टोटियों का हिसाब दें। उनके अनुसार, “सपा सरकार में स्कूलों की हालत इतनी खराब थी कि वहाँ बच्चों की जगह गाय और भैंसे पढ़ा करती थीं।”
लखनऊ का बुधवार (3 सितंबर) का यह प्रदर्शन न केवल सपा महिला मोर्चा के एजेंडे को सुर्खियों में ले आया, बल्कि भाजपा विधायक की बेटी विभावरी सिंह का बयान शाम तक सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। जहाँ एक ओर भाजपा इसे अपनी नेता की बेटी की निर्भीक पहचान के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के घमंड और लोकतंत्र पर संकट का संकेत बता रहा है।




