योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण पर प्रतिशत के बजाय केवल 5,000 रुपये की फ्लैट फीस देनी होगी। इसके साथ ही महिलाओं को संपत्ति खरीद पर अतिरिक्त छूट का लाभ भी मिलेगा। यह फैसला खासकर छोटे कस्बों और गांवों के लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
पारिवारिक बंटवारे पर बड़ी राहत
नए नियम के तहत परिवार में संपत्ति ट्रांसफर करने पर केवल 5,000 रुपये शुल्क देना होगा। पहले यह संपत्ति के मूल्य पर आधारित होता था और लागत लाखों तक पहुंच जाती थी।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि अब परिवार बिना किसी झंझट के आसानी से संपत्ति बांट सकेंगे। एल्डेको के सीओओ और क्रेडाई के सदस्य एस. के. जग्गी ने कहा कि यह कदम पारिवारिक विवाद खत्म करेगा और प्रक्रिया भी सरल होगी।
ग्रामीण परिवारों को सबसे बड़ा फायदा
लखनऊ के रजिस्ट्री कानून विशेषज्ञ एडवोकेट अब्दुल रहमान ने कहा कि यह बदलाव गांवों के लिए क्रांतिकारी है। पहले लोग महंगे शुल्क से बचने के लिए मौखिक समझौते कर लेते थे, जो बाद में बड़े विवाद का कारण बनते थे। अब 5,000 रुपये के फ्लैट शुल्क से लोग कागज़ी रजिस्ट्री कराने के लिए प्रेरित होंगे।
उन्होंने बताया कि इससे राजस्व अदालतों में चल रहे मुकदमे भी कम होंगे क्योंकि ज्यादातर केस स्टाम्प ड्यूटी को लेकर ही होते हैं।
बाराबंकी के एक किसान का उदाहरण सामने आया है। उन्होंने अपनी जमीन तीन बेटों में बांटी। पुराने नियमों में लाखों रुपये शुल्क देना पड़ता, लेकिन अब यह काम केवल 6,000 रुपये में पूरा हुआ। किसान के बेटे ने कहा, “इस नियम ने हमें पैसे और झगड़े दोनों से बचाया।”
महिलाओं के लिए अतिरिक्त छूट
कैबिनेट ने महिलाओं को संपत्ति खरीद पर अतिरिक्त छूट देने का भी फैसला किया है। अब महिलाओं के नाम पर 1 करोड़ रुपये तक की संपत्ति खरीद पर 1% अतिरिक्त छूट मिलेगी।
पहले यह लाभ केवल 10 लाख रुपये तक सीमित था और बड़े सौदों में महिलाओं को फायदा नहीं मिल पाता था। अब महिलाएँ रजिस्ट्री पर लगभग 1 लाख रुपये तक बचा सकेंगी।
एस. के. जग्गी ने कहा कि यह कदम महिलाओं की गृहस्वामित्व में भागीदारी बढ़ाएगा और “मिशन शक्ति अभियान को और मजबूत करेगा।”
खरीदारों की मुश्किलें बरकरार
हालांकि पारिवारिक ट्रांसफर पर राहत मिली है, लेकिन सामान्य संपत्ति बिक्री पर बोझ अभी भी भारी है।
- पुरुषों को सात प्रतिशत शुल्क देना पड़ता है।
- महिलाओं को एक प्रतिशत की छूट मिलती है।
- संयुक्त मालिकों को छह से सात प्रतिशत तक दर देनी पड़ती है।
- इसके अलावा एक प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क भी जुड़ा होता है।
नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों में एक और समस्या है। यहां सरकारी सर्किल रेट वास्तविक बाजार मूल्य से अधिक हैं। खरीदारों को कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई कीमत पर टैक्स देना पड़ता है।
प्रॉपर्टी ब्रोकर राजेश श्रीवास्तव ने कहा, “स्टाम्प ड्यूटी ऐसा टैक्स है जो हर खरीदार को चुभता है।” इसी कारण कई लोग दस्तावेज़ों में कम कीमत दिखा देते हैं और बाद में मुकदमों में फंस जाते हैं।
राजस्व और राहत का संतुलन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023–24 में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन से राज्य को 26,961 करोड़ रुपये मिले थे। 2025–26 में यह राशि बढ़कर 38,150 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। यह राज्य की कुल कर आय का लगभग 13 प्रतिशत है।
सरकार का कहना है कि यह कमाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, रियल एस्टेट डेवलपर्स का मानना है कि शहरों में बिक्री बढ़ाने के लिए सामान्य दरों को भी घटाना चाहिए।
फिलहाल, परिवार और महिलाएं नए नियमों से सीधी राहत पा रही हैं। यह फैसला सस्ती रजिस्ट्री, कम खर्च और स्पष्ट स्वामित्व अधिकार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।




