हाल ही में पद्म विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के संत प्रेमानंदजी के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाने पर लोगों ने काफी आलोचना की थी। ऐसे में कुछ दिनों से जगद्गुरु चर्चे में रहे हैं।
उन्होंने कहा, “बगैर पढ़े लिखे सब आज महर्षि वाल्मीकि और वेदव्यास बनना चाहते हैं। वे मेरी बात समझना नहीं चाहते। मेरी उपलब्धियों से उनको ईर्ष्या होती है तो मेरा दुष्प्रचार करते हैं। मैंने कभी किसी संत की निंदा नहीं की। हां, मैं विरोध करता हूं, जब कोई गलत करता है। जो कथा तो कर रहे हैं रामजी की और मौला अली- मौला अली कीर्तन करा रहे हैं, उनकी कथा कभी नहीं सुनना चाहिए।”
जगद्गुरु ने धर्म, शिक्षा, समाज, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर अपनी बात रखी। आइए जानते है कि स्वामी रामभद्राचार्य जी ने किन किन मुद्दों पर उन्होंने क्या क्या कहा।
कल्कि अवतार संभल में होगा
रामभद्राचार्य से जब भगवान कल्कि के भविष्य अवतार पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कल्कि अवतार संभल में ही होगा। वर्तमान में वहां की स्थिति दयनीय है और हिंदुओं का पलायन हो रहा है। सरकार को इसे रोकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी कलियुग की केवल 5,252 साल ही गुज़रे हैं। पूरे कलियुग की अवधि 4,32,000 साल है। इसलिए अवतार में काफी समय बाकी है।
ये कहना है जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी का। भास्कर की टीम उनके चित्रकूट आश्रम पहुची और ये खास बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने संस्कृत से लेकर अहंकारी होने जैसे सवालों के बेबाकी से जवाब दिए।
अहंकार का आरोप गलत
रामभद्राचार्य ने अपनी उपलब्धियों और पुरस्कारों पर उठते सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विद्वता का बखान करना अहंकार नहीं है, यह केवल स्वभाव है। आलोचकों की मानसिकता पर उन्होंने टिप्पणी की- “जिन्हें सम्मान या अवॉर्ड नहीं मिला, वे दूसरों पर अहंकारी होने का आरोप लगाते हैं।”
हनुमान चालीसा के पाठ पर स्पष्टीकरण
हनुमान चालीसा में बदलाव को लेकर उठे विवाद पर भी उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई करेक्शन नहीं किया, बल्कि पुरानी प्रतियों में जो पाठ मिलता है, वही बताया है। उदाहरण देते हुए कहा, “हनुमानजी शंकरजी के पुत्र नहीं हैं, बल्कि शंकरजी स्वयं हनुमानजी बने। इसलिए सही पंक्ति है-शंकर स्वयं केसरीनंदन।”
योग्य संत की पहचान
संतों की कथाओं को लेकर रामभद्राचार्य ने कहा कि हमें वही कथा सुननी चाहिए जो शास्त्रसम्मत और मर्यादा का पालन करती हो। उन्होंने कहा कि “जो रामकथा करते हुए बीच में मौला अली–मौला अली का कीर्तन करा रहे हैं, उनकी कथा कभी नहीं सुननी चाहिए।”
हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर राय
हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर जगद्गुरु ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हिंदुओं की भूमि का अधिग्रहण किया गया और राम जन्मभूमि प्रकरण में हजारों हिंदुओं की हत्या हुई। उनका मानना है कि जब समाज में संस्कार आएंगे तो वैमनस्य खत्म होगा।
भारत-चीन संबंधों को जरूरी बताया
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत पर टैक्स बढ़ाकर गलती की है। मोदी सरकार चीन से संबंध सुधारने की कोशिश कर रही है ताकि हमारी ज़मीन वापस मिले। यह भारत के लिए अच्छा कदम है।
जनसंख्या और हिंदू समाज पर विचार
उन्होंने कहा कि “हम दो हमारे दो” नीति सही नहीं है। हिंदुओं की संख्या बढ़ाने के लिए दो या तीन बच्चे होने चाहिए। साथ ही, हिंदू परिवारों की ‘घर वापसी’ भी जरूरी है। उन्होंने ऊंच-नीच की भावना को गलत बताया और समझाया कि शूद्र का अर्थ बुरा नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा का पात्र होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उन्होंने कहा कि वे एक बार और सत्ता में आएं। उनके बाद भी ऐसा नेता जरूर आएगा, जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेगा।
कुकर्म और अपराधों पर प्रतिक्रिया
मासूम बच्चियों से कुकर्म और घरेलू हिंसा पर उन्होंने कहा कि यह केवल कलियुग का असर नहीं है, पहले भी ऐसी घटनाएं होती थीं। फर्क सिर्फ इतना है कि तब मीडिया सक्रिय नहीं था। समाधान संस्कारों के माध्यम से ही होगा। संस्कार तभी आएंगे जब सब संस्कृत सीखेंगे और संस्कृति का पालन करेंगे।
भक्ति और ज्ञान में कोई भेद नहीं
मार्गों के भेद पर उन्होंने कहा कि भक्ति और ज्ञान में कोई अंतर नहीं है। ज्ञान की पराकाष्ठा भक्ति है और भक्ति की पराकाष्ठा ज्ञान है।
उन्होंने बताया कि चित्रकूट में चिकित्सा की समुचित सुविधा नहीं है। उनकी योजना है कि वहां केवल मेडिकल कॉलेज ही नहीं, बल्कि एक मेडिकल यूनिवर्सिटी बने। इसमें चिकित्सा की सभी पद्धतियों को शामिल किया जाएगा।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यह संदेश दिया कि समाज में संस्कार और संस्कृत शिक्षा का प्रसार जरूरी है। तभी अपराध कम होंगे और हिंदू समाज मजबूत बनेगा। उन्होंने भविष्य के लिए मोदी सरकार से उम्मीद जताई और संस्कारों को भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत बताया।




