उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में 2017 की तुलना में 2025 में बहुत सुधार हुआ है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने लखनऊ के दिए भाषण में बताया कि अब उत्तर प्रदेश के हर जनपद में आईसीयू बेड, मिनी आईसीयू, डिजिटल एक्स-रे, ब्लड बैंक और डायलिसिस की सुविधा मुफ्त उपलब्ध होगी। 2017 में कई जनपदों में आईसीयू के लिए एक भी बेड उपलब्ध नहीं था, जबकि आज यह स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2017 में प्रदेश के कई जिला स्तर के अस्पतालों में ICU सुविधाएं अत्यंत सीमित थीं और आवश्यक उपकरण व दवाओं की कमी भी थी। वहीं 2025 में स्वास्थ्य उपक्रमों के विस्तार के साथ डिजिटल सुविधा, ब्लड सेपरेटर यूनिट जैसी आधुनिक सुविधाएं गरीब मरीजों तक पहुंच रही हैं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत उत्तर प्रदेश में अब तक 5.34 करोड़ से अधिक परिवारों को कार्ड मिल चुका है और 80 लाख से अधिक लोगों ने इसका लाभ उठाया है। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए लगभग ₹3,000 करोड़ भारत सरकार के साथ मिलकर खर्च किए हैं। 2017 में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत ही हुई थी और उसका असर सीमित था, लेकिन अब यह योजना बड़े पैमाने पर प्रदेश में लागू हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के 11 लाख शिक्षको को कैशलेस मेडिकल सुविधा दी गई है, जिससे 55 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस प्रकार, 2017 की तुलना में 2025 तक यूपी में स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता, गुणवत्ता व पहुंच में व्यापक सुधार हुआ है। ICU बेड, मेडिकल सुविधा, कैशलेस इलाज, डिजिटल तकनीक और जनसंख्या स्तर पर फ्री डायलिसिस जैसी सुविधाएं पहले की तुलना में अब व्यापक रूप से उपलब्ध हैं। यह प्रगति सीएम योगी सरकार की स्वास्थ्य सुधार योजनाओं का परिणाम है, जो पूरे प्रदेश में बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवा देने पर केंद्रित है।
यूपी में स्वास्थ्य सुविधाओं का तुलनात्मक विश्लेषण (2017 बनाम 2025)
| पहलू | 2017 की स्थिति | 2025 की स्थिति (योगी सरकार के तहत) |
| ICU बेड उपलब्धता | दो तिहाई जनपदों में ICU बेड नहीं थे; केवल कुछ बड़े अस्पतालों मेंसीमित ICU सुविधाएं | सभी 75 जनपदों में ICU और मिनी ICU बेड उपलब्ध, डिजिटल एक्स-रे और ब्लड बैंक भी लगभग सभीजनपदों तक पहुंचा दिए गए हैं |
| डायलिसिस सुविधा | सीमित अस्पतालों पर उपलब्ध, गरीबों के लिए मुफ्त नहीं | सभी जनपदों में फ्री डायलिसिस सुविधा उपलब्ध |
| आयुष्मान भारत योजना | योजना शुरू हुई थी, कम कवरेज और सीमित लाभार्थी | 5.34 करोड़ परिवारों को कार्ड, 80 लाख से अधिक लाभार्थियों ने लाभ उठाया, ₹3,000 करोड़ से अधिकखर्च |
| कैशलेस मेडिकल सुविधा | किसानों, शिक्षकों आदि के लिए उल्लेखनीय योजना नहीं थी | 11 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा शुरू |
| चिकित्सकीय इन्फ्रास्ट्रक्चर | कई जिलों में आवश्यक उपकरण एवं दवाइयों की भारी कमी थी | आधुनिक उपकरण, ब्लड सेपरेटर यूनिट, डिजिटल रिपोर्टिंग, और बेहतर मेडिकल स्टाफ तैनाती |
| सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों की भूमिका | कई अस्पताल अधूरा व अयोग्य | निजी भागीदारी बढ़ी, अधिक सुविधाओं के साथ अस्पताल बने और सरकारी अस्पतालों का आधुनिकीकरण |
8 सालों में मेडिकल कॉलेज व अस्पताल बढ़े
2017 की तुलना में उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। 2017 में यूपी में केवल 12 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब 2025 तक यह संख्या 45 से अधिक हो चुकी है। इसके अतिरिक्त, कुछ रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश में कुल 78 मेडिकल कॉलेज भी हो चुके हैं, जिनमें 43 सरकारी और 35 निजी संस्थान शामिल हैं।
अस्पतालों की बात करें तो 2017 में प्रदेश में सरकारी अस्पतालों की संख्या लगभग 4,635 थी, जबकि अब स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण यह संख्या बढ़ी है। कई नए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और मातृत्व केंद्र स्थापित किए गए हैं, साथ ही अस्पतालों को मेडिकल कॉलेजों में अपग्रेड भी किया गया है जिससे बेड और आधारभूत सुविधाएं बढ़ाई गई है।
यह बदलाव दर्शाता है कि कैसे पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। ग़रीब और ग्रामीण क्षेत्र के लिए बेहतर इलाज और मेडिकल सुविधाओं के निर्माण में विशेषकर योगी सरकार ने बेहतर काम किया है।




