उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक युवक द्वारा आत्मदाह की कोशिश ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना को भाजपा सरकार की ‘निर्ममता’ और ‘नाइंसाफी’ से जोड़कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। लेकिन वीडियो में पीड़ित युवक खुद सपा के एक विधायक और उसके भाई पर घर छीनने की कोशिश और उत्पीड़न का आरोप लगा रहा है, जिससे अखिलेश यादव पर जनता को गुमराह करने और सच्चाई छिपाने के आरोप लग रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
घटना के विवरण के अनुसार, अलीगढ़ निवासी योगेंद्र उपकार बोबी (48) ने बुधवार को लखनऊ में सपा कार्यालय के सामने खुद को आग लगाने की कोशिश की। योगेंद्र अपने भाई गुड्डू और एक परिचित महिला सबा परीवीन के साथ लखनऊ पहुंचा था। अस्पताल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो में योगेंद्र ने स्पष्ट रूप से कहा कि सपा नेता समीर मेहदी और उसके भाई, जो ठेकेदार हैं, उसके घर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। उसने बताया कि वह पहले भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आवेदन दे चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वीडियो में योगेंद्र कहता है, “वो सपा नेता था… उसका नाम समीर मेहदी है, उसके भाई ठेकेदार हैं।”
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर किया लोगों को गुमराह
अखिलेश यादव ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, “निर्मम भाजपा सरकार से हताश होकर एक युवा ने आत्मदाह के द्वारा सरकार को जगाने के लिए जो कोशिश की है वो बेहद दर्दनाक है।” उन्होंने भाजपा सरकार पर नाइंसाफी, नाउम्मीदी और निराशा का आरोप लगाया। लेकिन वीडियो का विश्लेषण करने पर साफ होता है कि पीड़ित का मुख्य आरोप सपा से जुड़े लोगों पर है, न कि सीधे सरकार पर। पीड़ित ने पुलिस की निष्क्रियता का जिक्र जरूर किया, लेकिन घटना की जड़ सपा नेता के उत्पीड़न में बताई।
सपा कार्यालय के सामने आत्मदाह की कोशिश ने इस घटना को और रहस्यमय बना दिया। सूत्रों के मुताबिक, योगेंद्र ने बताया कि वह कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश कर चुका है, लेकिन FIR नहीं हुई। वहीं, उसके मोहल्ले में रहने वाले दानिश, कासिम, नजीम और मास्टर नाम के लोगों पर भी उसने 6 लाख रुपये उधार लेने और न लौटाने का आरोप लगाया है। इन लोगों को सट्टेबाजी (जुआ) का काम करने वाला बताया गया है। जब योगेंद्र ने पैसे मांगे, तो उसे गालियां और धमकियां मिलीं।
भाजपा समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने अखिलेश यादव की इस पोस्ट को ‘मिसइनफॉर्मेशन’ का क्लासिक उदाहरण बताया। एक यूजर ने अखिलेश की पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, “वीडियो में खुद पीड़ित सपा विधायक और उसके भाई का नाम ले रहा है। फिर भी अखिलेश यादव भाजपा पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। सच छुपाने और जनता को गुमराह करने की ये पुरानी आदत ही सपा की पहचान है।”
लोगों ने याद दिलाया सपा का गुंडा राज
अन्य यूजर्स ने भी सपा को ‘गुंडाराज’ की याद दिलाते हुए कहा कि यह घटना सपा के नेताओं की करतूत है, जिसे भाजपा सरकार पर थोपने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। गोतम पल्ली थाने में मामला दर्ज किया गया है, और पीड़ित का इलाज लखनऊ के एक अस्पताल में चल रहा है। भाजपा नेता विकास प्रताप सिंह राठौर ने कहा, “यह सपा की करतूत है, लेकिन अखिलेश जी इसे भाजपा पर थोप रहे हैं। बाबा जी का शासन है, यहां दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
यह घटना सपा के अध्यक्ष अखिलश यादव का सोशल मीडिया पर मिसइनफॉर्मेशन फैलाना दर्शाता है। जहां एक तरफ पीड़ित न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर अपने स्वार्थ के लिए पेश कर रहे है




