मिर्जापुर पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और वन भूमि पर कब्जा करने के आरोप में बिरहा गायिका सरोज सरगम और उनके पति राममिलन बिंद को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने सरोज की मंडली से जुड़े चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया है। गिरफ्तारी के साथ ही उनके यूट्यूब चैनल को बंद करा दिया गया है और मोबाइल सहित कई डिजिटल सबूत पुलिस ने जब्त किए हैं।
सरोज सरगम, जो मूल रूप से प्रयागराज के हंडिया थाना क्षेत्र के उपरदहा गांव की रहने वाली हैं, मिर्जापुर के मड़िहान इलाके में बिरहा गायिका के रूप में जानी जाती हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से अपने गानों को प्रसारित करना शुरू किया था। उनके चैनल का नाम “Saroj Sargam Mirzapur” है, जिसके करीब 63 हजार सब्सक्राइबर हैं और अब तक लगभग 40 वीडियो अपलोड किए गए थे। इन्हीं गानों में से कुछ ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया।
आपत्तिजनक गानों से भड़का विवाद
पुलिस जांच में पता चला है कि सरोज सरगम ने अपने कई वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं, खासकर मां दुर्गा और भगवान शिव के लिए बेहद भद्दी और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया था। एक गाने में उन्होंने महिषासुर का ज़िक्र करते हुए मां दुर्गा को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। इतना ही नहीं, उनके वीडियो के थंबनेल पर भी देवी-देवताओं को गाली लिखी हुई दिखाई दी। इस तरह की सामग्री सामने आने के बाद हिंदू समाज में गहरा आक्रोश फैल गया।
सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उनके गाने तेजी से वायरल हुए और यूजर्स ने पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की। कई हिन्दू संगठनों ने कहा कि सरोज ने केवल आस्था का अपमान ही नहीं किया बल्कि समाज में असामाजिक माहौल पैदा करने की कोशिश की है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पैसों के लिए बनाए विवादित गीत
पुलिस पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ कि सरोज सरगम और उनके पति पिछले तीन साल से पैसे लेकर विशेष वर्ग के लिए गाने बना रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि विवादित गाना प्रयागराज के राजवीर सिंह यादव के कहने पर तैयार किया गया था। यह गाना रिकॉर्ड कर प्रयागराज से ही यूट्यूब चैनल पर अपलोड कराया गया। सरोज ने यह भी माना कि भले ही 21 सितंबर को उनका पुराना वीडियो हटवा दिया गया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने फिर एक और आपत्तिजनक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
ईसाई धर्म में परिवर्तन
पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने जानकारी दी कि लगभग दस माह पहले सरोज सरगम और उनके पति ने ईसाई धर्म अपना लिया था। धर्म परिवर्तन के बाद भी वे बिरहा गायन के जरिए समाज में सक्रिय थे। लेकिन धार्मिक भावनाओं पर चोट करने वाले गीतों के कारण उनका काम विवादों में आ गया और इनकी गिरफ्तारी की नौबत आ गई।
वनभूमि पर 15 बीघा कब्जा
गांव स्तर पर की गई जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। पता चला कि सरोज सरगम और उनके पति ने मिर्जापुर के गढ़वा गांव में वन विभाग की लगभग 15 बीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ था। वे इस भूमि का इस्तेमाल खेती के लिए कर रहे थे। मामले की गंभीरता देखते हुए जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने 23 सितंबर को मौके पर पहुंचकर पैमाइश की और अवैध कब्जा हटवा दिया। प्रशासन ने इसे गंभीर अपराध बताया और कहा कि अब इस मामले में राजस्व व वन विभाग की अलग से कार्रवाई होगी।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 सितंबर को दरोगा संतोष कुमार राय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद साइबर सेल और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया गया। जांच में डिजिटल सबूत और वीडियो क्लिप मिलने के बाद बुधवार को पुलिस ने अभियान चलाकर सरोज सरगम और राममिलन बिंद के अलावा मंडली से जुड़े चार अन्य लोगों—सीताराम कोल, सुरेश कोल, प्रेम सरोज उर्फ प्रचण्ड और राकेश कुमार यादव—को भी गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से कई मोबाइल, डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक साहित्य बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि ये सभी साक्ष्य आगे की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
साम्प्रदायिक सौहार्द पर खतरा
प्रशासन ने स्पष्ट कहा कि सरोज सरगम के विवादित गाने और वीडियो न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि साम्प्रदायिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। अगर समय रहते कदम न उठाया जाता तो क्षेत्र की शांति व्यवस्था बिगड़ सकती थी। यही कारण है कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कड़ी कार्रवाई की।
इस पूरे प्रकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री डालकर लोकप्रियता पाने की कोशिश अब कानूनी जांच से बच नहीं सकती। धर्म, आस्था और सामाजिक सद्भाव के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। सरोज सरगम और उनका परिवार वर्तमान में पुलिस हिरासत में है, जबकि जिला प्रशासन ने कब्जाई गई जमीन को मुक्त कराकर वन विभाग को सौंप दिया है।




