विकासखंड रुदौली के 60 किसान सौर ऊर्जा की मदद से अच्छी खेती कर रहे हैं। कुसुम योजना के तहत अनुदान पर मिले सोलर पंप से फसलों की सिंचाई में लागत कम होने के साथ आमदनी बढ़ी है।
किसानों को बिजली कटौती से छुटकारा मिला है। डीजल की खपत भी कम हुई है। पिछले तीन वित्तीय वर्ष से किसानों का रुझान सोलर पंप के प्रति बढ़ा है। इस से फसल में लागत कम लगेगी और मुनाफा ख़ुद ब ख़ुद बढ़ जाएगी।
यूपी सरकार देश की सरकार के साथ मिलकर किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से काम कर रही है। सोलर प्लांट से पंप संचालित करने की कुसुम योजना के तहत सोलर पंप प्रदान किए जा रहे हैं। बिजली संकट से किसानों को राहत देने के लिए सरकार अब उनके निजी ट्यूबवेल को भी सोलर प्लांट से जोड़ रही है।
किसानों को दो एचपी से लेकर तीन एचपी एसी व डीसी और पांच एचपी से लेकर 10 एचपी तक एसी नलकूप पर अनुदान के तहत सोलर प्लांट मिल रहा है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुसुम योजना की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2023-24 व 2024-25 में कुल 60 किसानों को सोलर पंप का लाभ मिला है। इसके लिए 70 किसानों ने आनलाइन आवेदन किया था। सहायक विकास अधिकारी कृषि चंद्रसेन व रुदौली उपकृषि भवन के प्रभारी अनिल गौंड ने बताया कि सोलर पंप से किसानों की लागत कम होने के साथ उनकी आमदनी बढ़ी है।
किसान अब योजना के तहत सोलर पंप लगवाने के लिए ज्यादा इच्छुक है। इस वर्ष का लक्ष्य अभी नहीं मिला है। पिछले दो वर्षों में किसान सोलर पंप से लाभान्वित हुए हैं। इस से किसानो के जीवन में मूलभूत बदलाव आ रहे हैं। आमदनी बढ़ रही है और खर्च कम हो रहे हैं।
क्या है कुसुम योजना?
कुसुम योजना, यानी प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना, किसानों को सौर ऊर्जा से कृषि पंपों को चलाने, ग्रिड से जुड़े सौर संयंत्र स्थापित करने और अतिरिक्त सौर ऊर्जा बेचकर आय बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र को डीजल मुक्त करना, किसानों को वित्तीय और जल सुरक्षा प्रदान करना तथा कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। इस योजना में तीन मुख्य घटक हैं: घटक-ए (जमीन पर ग्रिड-कनेक्टेड सौर संयंत्र), घटक-बी (स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप) और घटक-सी (ग्रिड-कनेक्टेड पंपों का सौरीकरण)।




