फतेहपुर में हिंदू धर्मगुरुओं की हत्या की साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड मो. रजा का नेटवर्क उत्तर प्रदेश से लेकर केरल तक फैला हुआ था। यह खुलासा एसीएफ की पूछताछ और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से हुआ है। सूत्रों के अनुसार, जब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन खंगाले गए तो रजा का खतरनाक नेटवर्क सामने आया।
उसने तीन टीमें बनाई थीं और इन टीमों के बीच 300 धार्मिक वीडियो जारी किए थे तथा 13 टास्क सौंपे थे। संदेह है कि फतेहपुर के कुछ लोग भी उसकी ‘मुजाहिदीन आर्मी’ का हिस्सा हो सकते हैं। इसी कारण, रिमांड मिलने के बाद एटीएस दोबारा जिले में आ सकती है।
आम लोगों के बीच रह रहे थे आतंकी
सूत्रों के मुताबिक, यूपी एटीएस ने हाल ही में मो. रजा को केरल से गिरफ्तार किया है। अदालत ने उसे सात दिन की रिमांड भी दे दी है। बताया जा रहा है कि रजा की टीमों के सदस्य एक-दूसरे को बिल्कुल नहीं जानते थे। सभी बातचीत कोड वर्ड में होती थी। इसी कारण वह और उसके साथी आम लोगों के बीच रहकर भी आसानी से गुप्त रूप से काम करते रहे।
13 टास्क और 300 वीडियो का खुलासा
रजा का नेटवर्क यूपी के फतेहपुर, लखनऊ और वाराणसी जिलों में फैला बताया जा रहा है। इन जिलों से और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि दो दिन पहले एटीएस फतेहपुर आई थी और तीन लोगों से पूछताछ की थी। उसी के बाद 13 टास्क और 300 वीडियो का खुलासा हुआ।
टीम के सदस्यों की पहचान की कोशिश
एटीएस अब इन तीनों टीमों के सदस्यों की पहचान में जुटी है। दूसरी ओर, रजा के परिजन अब भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि वह आतंकी गतिविधियों में शामिल हो सकता है। अंडोली गांव में लोग उसके बारे में न तो अच्छा बोलते हैं, न बुरा।
आमने-सामने कराया जाएगा सामना
सूत्रों के अनुसार, रिमांड के दौरान गिरफ्तार पांचों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा सकती है। इससे उनकी तथाकथित ‘आर्मी’ से जुड़ी और भी कई जानकारियां सामने आ सकती हैं। इसके अलावा, रजा के मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट और बैंक खातों की भी जांच की जाएगी।
रजा के 13 मुख्य टास्क
रजा के प्रमुख निर्देशों में शामिल थे—
- शरीयत लागू करने के लिए धन एकत्र करना,
- युवाओं को जिहाद के लिए तैयार करना,
- सोशल मीडिया पर कट्टरपंथ फैलाना,
- संभावित आतंकी घटनाओं पर लगातार नजर रखना,
- हिंदू धर्मगुरुओं के बयानों की निगरानी करना,
- तीनों टीमों के बीच समन्वय बनाए रखना,
- दस्तावेज़ इकट्ठा करना, फोन कॉल करना और जरूरी सामान जुटाना,
- हथियारों का भंडारण करना,
- जिन स्थानों पर जाना या ठहरना है, उनके नक्शे तैयार करना,
- जांच एजेंसियों की गतिविधियों पर निगरानी रखना,
- आम नागरिकों की तरह व्यवहार करना ताकि शक न हो,
- जिहादी साहित्य एकत्र करना,
- और कार्रवाई के बाद छिपने की जगह तय करना।




