मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘स्वच्छ, अविरल और निर्मल गोमती’ के संकल्प को पूरा करने के लिए ‘गोमती नदी पुनर्जीवन मिशन’ की शुरुआत की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह मिशन आम लोगों की भागीदारी से जन-आंदोलन की तरह चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि गोमती में एक भी बूंद गंदा पानी (सीवेज) न गिरे। इसके लिए छोटी और लंबी दोनों तरह की योजनाएं बनाई जाएंगी। नदी के किनारे बनी अवैध बस्तियों और घुसपैठियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि नदी किनारे की सफाई और सुरक्षा बनी रहे।
गोमती का सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व
रविवार (12 अक्टूबर) को टेरिटोरियल आर्मी की पहल पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोमती नदी हमारी सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत और जीवन का प्रतीक है। यह मिशन सिर्फ पर्यावरण की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक साझा वादा भी होगा। यह मिशन पीलीभीत से गाजीपुर तक चलाया जाएगा। इसके तहत 95% से ज्यादा शहर का गंदा पानी रोकना, नदी में प्रदूषण कम करना और किनारों की प्राकृतिक स्थिति को सुधारना मुख्य लक्ष्य है।
गंदे पानी और ट्रीटमेंट संयंत्रों की स्थिति
बैठक में बताया गया कि गोमती में 39 बड़े नाले गिरते हैं, जिनमें से 13 बिना साफ किए ही गिर रहे हैं। अभी 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) 605 एमएलडी की क्षमता के साथ चल रहे हैं। इन प्लांट्स को ठीक से चलाने के लिए जरूरी है कि नालों का गंदा पानी इन तक पहुंचाया जाए। इसके लिए नए प्लांट लगाने और पुराने प्लांट्स को सुधारने की जरूरत है। इस बैठक में सेना और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी जैसे मेजर जनरल सलिल सेठ, ब्रिगेडियर नवतेज सिंह सोहल और ब्रिगेडियर सी. माधवाल भी मौजूद थे।
वेटलैंड और घाटों का विकास
मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में इकाना स्टेडियम के पास नए वेटलैंड बनाए जाएंगे। अवैध कब्जे हटाए जाएंगे, घाटों को सुंदर बनाया जाएगा और नदी किनारे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। अधिकारियों को हर महीने टास्क फोर्स की बैठकें करने और हर तीन महीने में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
टास्क फोर्स और खर्च
इस साल जनवरी में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत गोमती टास्क फोर्स बनाई गई थी। इसमें राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक, सिंचाई विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, लखनऊ नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हैं।
लखनऊ में गोमती नदी की लंबाई 101 किमी है, जिसमें 30 किमी हिस्सा शहर के अंदर आता है। 39 नालों में से 13 सीधे बिना सफाई के नदी में गिरते हैं। 2010 से 2025 तक गोमती को साफ करने के लिए करीब 2,500 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, फिर भी नदी का पानी आज भी काला ही है।




