मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर, सतत (सस्टेनेबल) और डिजिटल रूप से सशक्त बनाना शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ‘डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम’ के विकास की प्रक्रिया को तेज़ किया जाए, ताकि फसल, मौसम, बीज, सिंचाई, उर्वरक, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत सेवाओं से जुड़ी जानकारी किसानों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रियल टाइम में उपलब्ध कराई जा सके।
डिजिटल कृषि नीति की आवश्यकता पर बल
मुख्यमंत्री ने एक डिजिटल कृषि नीति तैयार करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जो राष्ट्रीय तकनीकी मानकों के अनुरूप हो और सुरक्षित साइबर अवसंरचना तथा नवाचार आधारित अनुसंधान को बढ़ावा दे।
यूपी एग्री-ग्रोथ प्रोजेक्ट (UP-AGRIS) की समीक्षा बैठक
मंगलवार (14 अक्टूबर) रात मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (UP-AGRIS) की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और तकनीकी रूप से सशक्त व टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक प्रभावी प्रयास बन रही है।
कृषि से उद्योग की ओर: एक समग्र दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने ‘कृषि से उद्योग’ के दृष्टिकोण को अपनाने पर ज़ोर दिया, जिसमें मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि UP AGRIS परियोजना को UP DASP परियोजना के साथ समन्वय में लागू किया जाए और इसे कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) से जोड़ा जाए।
28 ज़िलों में ₹4000 करोड़ की परियोजना
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि विश्व बैंक द्वारा समर्थित यह परियोजना करीब ₹4000 करोड़ (यूएस $500 मिलियन) की लागत से पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 ज़िलों में 6 वर्षों की अवधि में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना और किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ना है।
उत्पादकता, आधुनिक तकनीक और संसाधनों के कुशल उपयोग पर ज़ोर
यह परियोजना भूमि विकास, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर ज़ोर देती है।अधिकारियों द्वारा छोटे और सीमांत किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विपणन सहायता प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रमुख फसलों के लिए क्लस्टर विकास
कमोडिटी क्लस्टर दृष्टिकोण के तहत निम्नलिखित फसलों के क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं:
- मूंगफली – बुंदेलखंड
- लाल मिर्च और सब्जियां – वाराणसी
- केला, कालानमक चावल, उड़द, हरी मटर और आलू – बाराबंकी से आज़मगढ़ क्षेत्र में
मुख्यमंत्री ने केले की खेती में ‘टिशू कल्चर’ तकनीक को प्रोत्साहित करने और परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु क्षेत्रीय विशेषज्ञों की नियुक्तिके निर्देश भी दिए।
मत्स्य बीज उत्पादन राज्य में ही हो: सीएम
मत्स्य पालन क्षेत्र पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मत्स्य बीज का उत्पादन राज्य में ही किया जाए ताकि मत्स्यपालकों की लागत कम हो।
परियोजना के तहत लगभग 90,000 हेक्टेयर क्षेत्र को मत्स्य उत्पादन के लिए विकसित किया जाएगा, जिससे करीब एक लाख परिवारों को लाभ मिलने का लक्ष्य है।
इसमें क्लस्टर विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज आपूर्ति, नई तकनीक और उत्पादन से विपणन तक की मजबूत व्यवस्था शामिल है।
कृषि वित्तीय प्रणाली को मज़बूत करने पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने कृषि वित्तीय प्रणाली को सशक्त करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जिसमें
- छोटे एवं सीमांत किसानों,
- कृषि आधारित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को
- ऋण सुविधा, जोखिम प्रबंधन व्यवस्था और निजी निवेश को बढ़ावा देने की बात शामिल है।
संस्थागत तैयारी में प्रगति
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना से संबंधित संस्थागत तैयारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है:
- सामाजिक और पर्यावरणीय मूल्यांकन कार्य पूरा हो चुका है।
- मॉनिटरिंग, लर्निंग और इवैल्यूएशन एजेंसियां तथा तकनीकी सहायता एजेंसियों का चयन कर लिया गया है।
- अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) के साथ 6 वर्षीय उत्पादकता कार्यक्रम के लिए समझौता स्वीकृत हो चुका है।
किसानों को प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित किया जाए
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है।
उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना के प्रत्येक घटक की नियमित समीक्षा की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने UP AGRIS परियोजना की सतत निगरानी के लिए आवश्यक व्यवस्था करने को भी कहा।




