विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा ने उत्तर प्रदेश के कृषि मॉडल की सराहना की है। उन्होंने इसे सतत कृषि और जलवायु अनुकूलन के लिए एक वैश्विक मानक बताया, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए। मई में अपनी हालिया यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं देखा कि राज्य का कृषि तंत्र कैसे नवाचार, मजबूती और व्यावहारिक समर्थन को जोड़कर एक काम करने वाला मॉडल बन गया है, सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि ज़मीनी सच्चाई।
शुरुआत से ही जलवायु अनुकूलता पर ज़ोर
बंगा ने योगी आदित्यनाथ सरकार की उस कोशिश की सराहना की जिसमें जलवायु अनुकूलता को कृषि प्रणाली का हिस्सा शुरुआत से ही बनाया गया। उत्तर प्रदेश में गर्मी सहन करने वाले बीज, मिट्टी-विशिष्ट उर्वरक, पुनर्योजी कृषि पद्धतियाँ, कुशल सिंचाई प्रणाली और मजबूत फसल बीमा योजनाएं अपनाई गई हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि एक खराब मौसम किसान की पूरी ज़िंदगी बर्बाद न कर दे।
डिजिटल तकनीक: पूरी प्रणाली को जोड़ने वाली कड़ी
बंगा ने कहा कि इस सफलता की मुख्य वजह डिजिटल तकनीक है। सरल एआई टूल्स और मोबाइल फोन की मदद से किसान बीमारियों की पहचान कर सकते हैं, उर्वरकों की सलाह ले सकते हैं, मौसम की शुरुआती चेतावनियां पा सकते हैं और सुरक्षित डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। ये डिजिटल टूल्स किसानों का क्रेडिट इतिहास भी बनाते हैं, जिससे उन्हें सस्ते और आसान ऋण मिलते हैं और वे वित्तीय प्रणाली में बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं। इससे विश्वास और निवेश का एक सकारात्मक चक्र बनता है।
सहयोग और मॉडल का विस्तार ज़रूरी
बंगा ने ज़ोर दिया कि उत्तर प्रदेश के कृषि मॉडल की सफलता सरकार, व्यापार जगत और विकास साझेदारों के आपसी समन्वय पर निर्भर है। उन्होंने विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच हुए सहयोग की सराहना की, जिसके तहत हाल ही में यूपी एग्रीज (UP AGREES – Uttar Pradesh Agriculture Growth and Rural Enterprise) प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को मौसम, बीज, बाजार और बीमा की जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रीयल टाइम में देना है। यह परियोजना लगभग दस लाख छोटे और सीमांत किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखती है।
दुनिया के लिए एक उदाहरण
बंगा ने उत्तर प्रदेश को “स्मार्ट कृषि परिवर्तन का एक जीवंत मॉडल” बताया और कहा कि अन्य राज्यों और देशों को इससे सीखना चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि लचीलापन (resilience) शुरुआत से ही प्रणाली में शामिल होना चाहिए और यह तकनीक व सहकारी प्रणालियों के सहयोग से ही संभव है, जिससे छोटे किसानों की आजीविका टिकाऊ बन सके।
वैश्विक स्तर पर महत्वाकांक्षी लक्ष्य
बंगा ने उत्तर प्रदेश की सराहना के साथ ही विश्व बैंक के भविष्य के बड़े कृषि लक्ष्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक विश्व बैंक कृषि कारोबार के लिए अपनी वार्षिक प्रतिबद्धता को बढ़ाकर 9 अरब डॉलर करने और अतिरिक्त 5 अरब डॉलर निजी भागीदारों से लाने की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे “बेशर्मी से चुराओ और खुले दिल से साझा करो” की रणनीति कहा — यानी सफल मॉडल्स से सीखो और उन्हें दुनिया भर में फैलाओ।
बंगा की यात्रा से जुड़े अनुभव
अपनी यात्रा को याद करते हुए बंगा ने कहा, “कुछ महीने पहले मैं उत्तर प्रदेश में था और मैंने देखा कि कैसे सब कुछ एक साथ काम कर रहा था -नींव, सहकारी संस्थाएं, लचीलापन, और सबसे ज़रूरी, वह डिजिटल सिस्टम जो सबको जोड़ रहा था। इससे परिणाम मिले। इसका सबूत है -यह काम करता है, और हमें इसे विस्तार देना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि लचीलापन शुरू से ही व्यवस्था में होना चाहिए, बाद में जोड़ा नहीं जाना चाहिए, और डिजिटल सिस्टम कृषि को और अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बंगा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सफलता दुनिया के अन्य हिस्सों को भी प्रेरित कर सकती है।




