गोवर्धन पूजा के शुभ अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (22 अक्टूबर) को गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और गौसेवा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि “दीपोत्सव के पंचदिवसीय महापर्व की श्रृंखला में आज पावन गोवर्धन पूजा का दिन है। भारत की कृषि आधारित परंपरा का प्रतीक यह पर्व सदियों से हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। इस अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हृदय से शुभकामनाएं देता हूं।”
गोवर्धन पूजा कृषि संस्कृति का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गौ और गौवंश का महत्व अपार है। गोवर्धन पूजा इसी परंपरा का प्रतीक है और दीपावली जैसे महापर्व से इसके जुड़ाव ने इसे और भी विशेष बना दिया है। उन्होंने कहा कि “आज मुझे गौपूजन और गौसेवा का अवसर प्राप्त हुआ, यह मेरा सौभाग्य है। भारत की समृद्धि का आधार सदैव भारतीय गौवंश रहा है।”
गौवंश संरक्षण में नवाचार
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से देशभर में ‘गोवर्धन योजना’ के तहत गौवंश से बायो कंपोस्ट व इथेनॉल बनाने के अभिनव कार्यक्रम चल रहे हैं, जो संरक्षण और संवर्धन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल पूजन ही नहीं, बल्कि उसके अनुरूप ठोस कार्ययोजना भी शुरू की जा रही है।
16 लाख गौवंश पर मिल रही सब्सिडी
उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में 16 लाख गौवंश ऐसे हैं जिन्हें राज्य सरकार सब्सिडी दे रही है ताकि किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। इसके लिए राज्य में तीन प्रमुख योजनाएं लागू हैं—
- निराश्रित गोशाला योजना: प्रति गाय 1500 रुपये मासिक सरकारी सहायता।
- सहभागिता योजना: यदि कोई किसान कार्यक्रम से जुड़ता है तो उसे चार गौवंश दिए जाते हैं, जिससे वह परिवार सरकार से प्रतिमाह 6000 रुपये तक प्राप्त कर सकता है।
- कुपोषण निवारण योजना: कुपोषित माताओं और बच्चों वाले परिवारों को गोशालाओं से गायें दी जाती हैं, सेवा के साथ उन्हें 1500 रुपये प्रति माह मिलते हैं।
किसानों को मिल रहा गोबर का मूल्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में परिवार इन योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रदेश में ‘गोवर्धन योजना’ के अंतर्गत बायोगैस और इथेनॉल उत्पादन की नई तकनीकें शुरू की गई हैं, जिससे अन्नदाता किसानों को अब गोबर का उचित मूल्य मिल रहा है और वे समृद्धि की ओर अग्रसर हैं।




