लखनऊ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात और मुरादाबाद में आयोजित माटीकला मेलों में खरीदारों की उत्साही भागीदारी देखने को मिली, जिससे प्रदेश के पारंपरिक माटीकला उद्योग को नई ऊर्जा मिली। 70 जनपदों में आयोजित लघु माटीकला मेलों में ₹2.19 करोड़ की उल्लेखनीय बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष से ₹91 लाख अधिक है। यह प्रयास कारीगरों को सीधे उपभोक्ता से जोड़ने में बेहद सफल रहा। योगी सरकार द्वारा पारंपरिक माटीकला को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड गठन सहित कई अभिनव कदम उठाए गए हैं, जिनसे कारीगरों को नई पहचान और बाजार मिला है।
उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में आयोजित राज्य, क्षेत्रीय और जिला-स्तरीय मेलों में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। इस अवधि में 10-दिवसीय माटीकला महोत्सव, 07-दिवसीय क्षेत्रीय मेले और 03-दिवसीय लघु मेले आयोजित किए गए। कुल 691 दुकानों के माध्यम से ₹4,20,46,322 का विक्रय हुआ, जो पिछले वर्ष दर्ज ₹3,29,28,410 की तुलना में ₹91,17,912 अधिक है और लगभग 27.7% वृद्धि दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पारंपरिक उद्योगों में कार्यरत कारीगरों के सशक्तीकरण और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसमें बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
70 जिलों में मजबूत बिक्री, कारीगरों की बढ़ी आय
खादी भवन, लखनऊ में 10 से 19 अक्टूबर 2025 तक आयोजित 10-दिवसीय महोत्सव में 56 दुकानों ने ₹1,22,41,700 की बिक्री की। इसी तरह, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात व मुरादाबाद में 13 से 19 अक्टूबर तक आयोजित 07-दिवसीय क्षेत्रीय मेलों में 126 दुकानों ने ₹78,84,410 का विक्रय किया। साथ ही, 17 से 19 अक्टूबर तक प्रदेश के 70 जिलों में आयोजित 03-दिवसीय लघु मेलों में 509 दुकानों द्वारा ₹2,19,20,212 की बिक्री दर्ज की गई। पिछले वर्ष 878 दुकानों ने ₹3,29,28,410 का विक्रय किया था, लेकिन इस वर्ष कम दुकानों के बावजूद अधिक बिक्री ने उत्पाद गुणवत्ता, बेहतर प्रबंधन और मजबूत बाजार समर्थन को साबित किया। उपभोक्ताओं में माटीकला उत्पादों के प्रति जागरूकता और आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। बोर्ड का लक्ष्य प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, प्रदर्शनी प्रबंधन और ब्रांडिंग के माध्यम से कारीगरों को दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तीकरण देना है।
पारंपरिक शिल्प संरक्षण और नवाचार में योगी सरकार की बड़ी भूमिका
योगी सरकार ने पारंपरिक कला और कारीगरों की सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, तकनीकी सहयोग और विपणन विस्तार हेतु माटीकला बोर्ड का गठन किया है। इस पहल से पारंपरिक माटीकला को नई पहचान मिली है और हजारों परिवार आत्मनिर्भर बने हैं। प्रजापति समुदाय के कारीगरों को गांव के तालाबों से मिट्टी निःशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लागत में कमी और उत्पादन सुगमता सुनिश्चित करता है। इस नीति ने कारीगरों के लिए उत्पादन मार्ग सुदृढ़ किया है और शिल्प को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई है। खादी एवं ग्रामोद्योग तथा माटीकला बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी समर्थन से कारीगर सीधे उपभोक्ता से जुड़े और पारंपरिक उत्पादों को व्यापक स्वीकृति मिली। आने वाले समय में मेलों का दायरा और जिलों तक बढ़ाया जाएगा ताकि प्रदेश के माटीकला उत्पाद राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और मजबूत उपस्थिति दर्ज कर सकें।




