बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारतीय मूल के विवादित इस्लामिक प्रचारक और भगोड़े जाकिर नाइक को देश में प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया है। यह फैसला मंगलवार (नवंबर 4) को सचिवालय स्थित गृह मंत्रालय में आयोजित कानून एवं व्यवस्था कोर कमेटी की बैठक में लिया गया। दैनिक प्रोथोम आलो के अनुसार, बैठक में नाइक की संभावित यात्रा पर विस्तार से चर्चा हुई।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि जाकिर नाइक बांग्लादेश पहुंचते हैं तो विशाल भीड़ जुट सकती है, जिसके चलते सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती जरूरी होगी। वर्तमान परिस्थितियों में इतनी अधिक संख्या में सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराना संभव नहीं है, इसलिए सरकार ने उनके प्रवेश को रोकने का फैसला किया है।
कोर कमेटी की बैठक का निर्णय
कानून-व्यवस्था संबंधी इस बैठक की अध्यक्षता गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मोहम्मद जहांगीर आलम चौधरी ने की। इस दौरान यह भी सामने आया कि हाल ही में ‘स्पार्क इवेंट मैनेजमेंट’ नामक कंपनी ने फेसबुक पर दावा किया था कि वह नवंबर के अंत में जाकिर नाइक को बांग्लादेश बुला रही है।
कंपनी ने इसे “डॉ. ज़ाकिर नाइक बांग्लादेश टूर 2025” का आधिकारिक आयोजन बताया और दावा किया कि कार्यक्रम सरकार की अनुमति और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से होगा, लेकिन अब सरकार के फैसले से यह दावा निरस्त होता दिख रहा है।
‘किसी भगोड़े को पनाह न मिले’
बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि उसने भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा नाइक की संभावित यात्रा पर की गई टिप्पणी को नोट किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एसएम महबूबुल आलम ने एएनआई से कहा कि बांग्लादेश ने भारतीय मंत्रालय के बयान को गंभीरता से लिया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश का मानना है कि भारत सहित किसी भी देश को दूसरे देश के आरोपी या भगोड़े व्यक्ति को आश्रय नहीं देना चाहिए। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि ढाका नाइक को लेकर सख्त रुख अपना रहा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन चाहता है।
