कुशीनगर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 10 साल की जेल काटकर लौटे एक व्यक्ति ने पाया कि उसकी अनुपस्थिति में उसका परिवार पूरी तरह बदल चुका है। पत्नी ने धर्म और रीति-रिवाज बदल लिए, बच्चों का दाखिला मदरसे में हो गया और एक बेटा नया नाम अपनाकर पिता को पहचानने से भी इनकार भी कर दिया। पुलिस ने इस मामले में मदरसे के प्रधानाचार्य को गिरफ्तार किया है और जांच शुरू कर दी है।
10 साल बाद घर लौटा तो नहीं पहचान पाया परिवार
कुशीनगर जिले के हनुमानगंज थाना क्षेत्र के मंशा छापर गांव के रहने वाले महेंद्र कुशवाहा (45) की जिंदगी तब बदल गई जब वह अपनी 10 साल की सजा पूरी कर 4 सितंबर को जेल से घर लौटा। पत्नी राबड़ी देवी से 15 साल पहले उसकी शादी हुई थी और उनके तीन बच्चे थे। लेकिन इतने लंबे समय बाद लौटे महेंद्र को घर की हालत और पत्नी का बदला पहनावा देखकर झटका लगा।
राबड़ी देवी अब बुर्का पहनती हैं, पांच वक्त की नमाज पढ़ती हैं और इस्लामी रीति-रिवाजों पर चलती हैं। महेंद्र के मुताबिक, इतनी बड़ी तब्दीली देखकर उनका “सिर चकरा गया।”
बेटे ने कहा- “ये मेरे पिता नहीं हैं”
परिवार की असली स्थिति का पता तब चला जब महेंद्र बच्चों के बारे में जानकारी लेने लगा। पत्नी ने बताया कि दोनों बेटे स्थानीय मदरसे में पढ़ाई करते हैं। महेंद्र रविवार को बच्चों से मिलने जब मदरसे पहुंचा, तो वहां हालात और भी चौंकाने वाले निकले।
बड़े बेटे विपिन (14) का नाम बदला जा चुका था। अब उसे नूर आलम कहा जा रहा है। वहीं दूसरा बेटा बिट्टू भी वहीं पढ़ाई कर रहा है। जब पिता ने बच्चों से बातचीत करनी चाही तो विपिन ने साफ कह दिया कि वह उन्हें पहचानता नहीं। इस बात से महेंद्र का दिल टूट गया।
शिकायत पर मदरसा प्रबंधक गिरफ्तार
महेंद्र ने आरोप लगाया कि मदरसे के प्रधानाचार्य मुजीबुर्रहमान ने परिवार की आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर उसकी पत्नी और बच्चों का धर्म परिवर्तन कराया। बच्चों को नया नाम देकर मदरसे में रखा गया और पिता के सवाल उठाने पर गाली-गलौज व धक्का-मुक्की भी की गई।
इसके बाद पीड़ित ने रविवार (10 सितंबर) को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि महिला और उसके बच्चों को मुफ्त भोजन, कपड़े और शिक्षा का लालच देकर इस्लाम कबूल करवाया गया। पुलिस ने आरोपी के पास से एक चोरी की बाइक भी बरामद की और उसे जेल भेज दिया।
“मैं आ गया हूं, अब सब संभाल लूंगा”- महेंद्र
महेंद्र का कहना है कि उसकी गैरमौजूदगी में परिवार टूट गया। उसका एक बच्चा भी इस बीच गुजर गया और बाकी बच्चों व पत्नी पर किसी का सहारा नहीं था। महेंद्र ने कहा,
“जब मैं जेल में था तब ये बिखर गए। अब मैं लौट आया हूं। सब संभाल लूंगा। मैं अपने परिवार के लिए मेहनत करूंगा और इन्हें खुश रखूंगा।”
टोना-टोटका से शुरू हुई कहानी
स्थानीय लोगों के अनुसार, महेंद्र के जेल जाने के बाद पत्नी राबड़ी देवी ने एक बेटे की मौत का गम सहा। उस समय किसी ने उन्हें समझाया कि परिवार पर टोना-टोटका हो गया है। इसके बाद वे सोखा-ओझा के पास जाने लगीं और धीरे-धीरे मजारों से जुड़ गईं। लगभग चार साल पहले उनका जीवन पूरी तरह बदल गया।
उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया और अपने बेटों को भी मदरसे में भेज दिया। बड़ा बेटा विपिन नूर आलम बन गया और अब वे परिवार समेत इस्लामी रीति-रिवाज अपना रहे हैं।
पुलिस केस और आगे की जांच
फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामला धर्म परिवर्तन और उत्पीड़न से जुड़ा है। आरोपी प्रधानाचार्य पर मामला दर्ज कर उसे जेल भेजा गया है। पुलिस आगे यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में और लोग शामिल हैं और महिला व बच्चों पर दबाव किस हद तक डाला गया।
इस सनसनीखेज मामले ने कुशीनगर में चर्चाएं तेज कर दी हैं। 10 साल बाद लौटे एक पिता के लिए यह झटका बेहद गहरा साबित हुआ है, जबकि अधिकारी जांच को पूरी तरह कानून के दायरे में अंजाम देने की बात कह रहे हैं।




