Sunday, April 19, 2026
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बरेली हिंसा: नमाज के बाद भीड़ के सहारे ताकत दिखाने की फिराक में थे तौकीर रजा, पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम के कबूलनामे से खुलासा

नदीम खां के अनुसार, डेढ़ साल से मौलाना तौकीर बरेली में बड़ी भीड़ खींचने में नाकाम रहा था। इस दौरान उसको अपनी पहचान और रुतबे को लेकर चिंता बढ़ गई थी। कानपुर से खड़ा हुआ आई लव मोहम्मद का संवेदनशील मामला और उसे एक मौका लगा कि इसकी आड़ में पश्चिमी यूपी के मुसलमानों में पैठ बनाकर खुद को रहनुमा के तौर पर स्थापित किया जा सकता है।

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इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां शुक्रवार की नमाज के बाद इस्लामिया मैदान में भारी भीड़ जुटाकर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहा था। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों को भी वह अपना रुतबा दिखाना चाहता था। पूछताछ में आईएमसी के पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम खां ने पुलिस को यह अहम जानकारी दी।

नदीम खां के अनुसार, डेढ़ साल से मौलाना तौकीर बरेली में बड़ी भीड़ खींचने में नाकाम रहा था। इस दौरान उसको अपनी पहचान और रुतबे को लेकर चिंता बढ़ गई थी। कानपुर से खड़ा हुआ आई लव मोहम्मद का संवेदनशील मामला और उसे एक मौका लगा कि इसकी आड़ में पश्चिमी यूपी के मुसलमानों में पैठ बनाकर खुद को रहनुमा के तौर पर स्थापित किया जा सकता है।

इसके सहारे मौलाना राजनीतिक जमीन भी मजबूत कर सकता था और कांग्रेस, सपा और बसपा के साथ समय-समय पर बनाए गए रिश्तों को और पुख्ता कर सकता था। खुद को प्रभावशाली मुस्लिम नेता साबित करने के इस प्रयास में ही उसने बवाल का ताना-बाना बुना। जिसके कारण बरेली में इतना बड़ा हंगामा हुआ। अपने राजनीतिक फ़ायदा के लिए उसने सैकड़ों मुस्लिम युवाओं को भड़काया और जुमे के दिन बवाल काटा। 

झूठे पत्र और भड़काऊ रणनीति

नदीम खां ने जेल भेजे जाने से पूर्व कबूल किया कि उसने और प्रवक्ता डॉ. नफीस ने ही असली खेल रचा था। प्रदेश मीडिया प्रभारी लियाकत खां के फर्जी दस्तखत कराकर पुलिस को पत्र सौंपा गया, जिसमें प्रदर्शन स्थगित करने का जिक्र था। यह फैसला अधिकारियों से हुई बातचीत और तौकीर से मिली सहमति के बाद हुआ था।

लेकिन जब पत्र पार्टी ग्रुप में पहुंचा तो मौलाना ने लियाकत का नाम देखकर विरोध जताया। मुनीर के गुट ने मौलाना को भड़काया और कहा कि बिना मौजूदगी के नाम लिख दिया गया है। इसके बाद पत्र को जाली करार दिया गया और मौलाना ने वीडियो जारी कर इसे फर्जी करार दे दिया। इससे आयोजन कराने की अड़ियल जिद और भड़काऊ माहौल तैयार हुआ।

गुटबाजी से बिगड़ा हालात

पुलिस जांच में सामने आया कि मौलाना के करीबी दो गुटों में बंटे हुए हैं। एक ओर नदीम-नफीस तो दूसरी ओर मुनीर इदरीशी, अनीस सकलैनी और अहसानुल हक खड़े थे। मौलाना कभी एक गुट सुनते तो कभी दूसरे गुट की बातों पर आ जाते। इस बार नदीम के पत्र जारी करने पर मुनीर के गुट ने माहौल खराब कर दिया।

नदीम का कहना है कि वह लोगों को शांत कराने की कोशिश कर रहा था और फोन पर समझा भी रहा था कि इस्लामिया मैदान न जाया जाए। हालांकि पुलिस का कहना है कि नदीम भी घटनाक्रम का अहम आरोपी है और उससे मिली जानकारियां अन्य आरोपियों की धरपकड़ और केस की विवेचना में मदद करेंगी।

और पढ़े: बरेली बवाल के बाद प्रशासन की बड़ी करवाई: तौकीर रजा के खास डॉ. नफीस की 36 दुकानों वाली मार्केट और आईएमसी दफ्तर सील

31 आरोपी और जिलाध्यक्ष सादिक गिरफ्तार

एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक, मौलाना के हाउस अरेस्ट के बाद पुलिस कार्रवाई तेज हुई। पहले नदीम कटरा (शाहजहांपुर) भाग गया लेकिन पकड़ा गया। वहीं, बारादरी पुलिस ने उमेद, मुस्तकीम, अरबाज, कलीम, मोबीन, नाजिम रजा, मोहसिन, शाकिब, रफीक, जैनुल, तौहीन, फैसल, अरशद और सुब्हान को ग‍िरफ्तार किया। देर रात फरीदपुर निवासी आईएमसी जिलाध्यक्ष सादिक खान को भी हिरासत में लिया गया।

UP4India Desk
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