उत्तर प्रदेश सरकार 7 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती को भव्य रूप से मनाने जा रही है। सीएम योगी ने इस अवसर पर सभी जिलों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन का निर्देश दिया है। कार्यक्रमों में रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, दीप प्रज्ज्वलन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। योगी सरकार ने संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की अधिक से अधिक उपस्थिति और जनसहभागिता हो।
लालापुर चित्रकूट में होगा मुख्य आयोजन
मुख्य कार्यक्रम लालापुर, चित्रकूट में महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली पर आयोजित किया जाएगा। सुबह 11 बजे वाल्मीकि जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद विराट महाराज और संस्कृत के छात्र रामायण पाठ, पूजन-हवन और भजन प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके योगदान को याद किया जाएगा। इस अवसर पर स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रहेगी।
प्रदेशभर में होंगे सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम
मुख्य आयोजन के साथ-साथ पूरे प्रदेश में भी विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। खास तौर पर तुलसीदास आश्रम राजापुर चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर (कानपुर), श्रावस्ती, अयोध्या, और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों पर सांस्कृतिक व धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इन स्थलों पर दीप प्रज्ज्वलन, भजन संध्या और सामूहिक आरती के आयोजन से वातावरण आध्यात्मिक माहौल में रंगेगा।
सीएम योगी का निर्देश: हर स्तर पर पुख्ता व्यवस्थाएं
सीएम योगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह कार्यक्रम जनपद, तहसील और विकासखंड स्तर पर एक समान रूप से मनाया जाए। सरकार ने साफ-सफाई, पेयजल, ध्वनि व्यवस्था, प्रकाश और सुरक्षा जैसे सभी इंतज़ामों पर विशेष ध्यान देने को कहा है। जिला प्रशासन, संस्कृति विभाग, सूचना जनसंपर्क विभाग और पर्यटन विभाग की संयुक्त समितियों को आयोजन की रूपरेखा तैयार करने और उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का जिम्मा दिया गया है।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा सांस्कृतिक मंच
योगी सरकार इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दे रही है। उन्हें भजन, नृत्य, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाएगा। इससे न केवल प्रदेश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि स्थानीय कलाकारों की पहचान भी बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों के जरिए प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा और दिशा मिलती है।
सामूहिक उत्सव की दिशा में बड़ा कदम
यूपी सरकार चाहती है कि महर्षि वाल्मीकि जयंती केवल एक धार्मिक कार्यक्रम न होकर सामूहिक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाई जाए। सीएम योगी ने कहा है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, ताकि यह पर्व समाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन सके।




