बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने आज पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर आयोजित विशाल महारैली को संबोधित किया। इस मौके पर देश के विभिन्न राज्यों से कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंचे। रैली स्थल के आसपास भारी भीड़ देखने को मिली।
रैली में मायावती के साथ आकाश आनंद ने भी भाषण दिया। लोकसभा और विधानसभा में बसपा की कमजोर होती उपस्थिति को देखते हुए पार्टी अपने संगठन को पुनः मजबूत करने और दलित समाज में पैठ गहरी करने की कोशिश में है। इसी लक्ष्य से इस बार परिनिर्वाण दिवस पर इतनी बड़ी रैली का आयोजन किया गया।
मायावती का कांग्रेस और सपा पर हमला
अपने संबोधन में मायावती ने सपा और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला और भाजपा सरकार की कुछ नीतियों की सराहना भी की। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जिसने आपातकाल के दौरान संविधान का अपमान किया, वही आज हाथ में संविधान की प्रति लेकर दिखावा कर रही है। मायावती ने कहा कि सपा की सरकार में दलितों और पिछड़ों पर अत्याचार हुआ, कानून व्यवस्था बिगड़ी, और गुंडों को संरक्षण मिला।
स्मारकों और नाम बदलने को लेकर सपा पर आरोप
सपा पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता में आने पर कांशीराम स्मारक बनाने की बात कर रहे हैं, जबकि सत्ता में रहते यह नहीं किया। उन्होंने कहा कि सपा नेताओं को बसपा संस्थापक और दलित संत केवल तब याद आते हैं जब वे विपक्ष में होते हैं, सत्ता में आने पर भूल जाते हैं। मायावती ने कहा कि उनकी सरकार ने कांशीराम के नाम पर कई स्मारक और संस्थान बनाए थे, लेकिन सपा सरकार ने उनके नाम बदल दिए। यह सपा का दोगलापन और दोहरा रवैया दिखाता है।
भाजपा सरकार की तारीफ, स्मारक संरक्षण पर चर्चा
मायावती ने भाजपा सरकार का आभार जताते हुए कहा कि योगी सरकार ने स्मारक के रखरखाव के लिए टिकट से होने वाली आय को पारदर्शी ढंग से उपयोग किया, जबकि सपा सरकार ने पहले इसका पैसा रोक लिया था। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में कांशीराम के सम्मान में बनाए गए स्मारकों को भाजपा सरकार ने उचित देखरेख दी है।
पदोन्नति में आरक्षण और दलित अधिकारों का मुद्दा
मायावती ने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों ने पदोन्नति में आरक्षण का विरोध किया और दलित-पिछड़ों को उनका हक नहीं दिया। सपा ने तो विधानसभा में आरक्षण से जुड़ा बिल तक फाड़ दिया था। उन्होंने अपील की कि धार्मिक मामलों पर विवाद से बचकर सभी को बाबा साहेब के संविधान के अनुसार हर धर्म का सम्मान करना चाहिए, और धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।




