Tuesday, March 3, 2026
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काशी में देव दीपावली: पीएम मोदी ऑनलाइन शामिल होंगे; 2 लाख श्रद्धालु उमड़ेंगे, लेज़र शो और आतिशबाज़ी का आकर्षण

देव दीपावली पर गंगा आरती सबसे भव्य रूप में होती है। जहां आम दिनों में 7 अर्चक आरती करते हैं, वहीं इस दिन 21 अर्चक और 42 देव-कन्याएं शामिल होंगी। देव-कन्याएं इस दौरान चंवर चलाकर आरती में भाग लेती हैं। यह दृश्य काफी मनमोहक और ऐतिहासिक माना जाता है।

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वाराणसी में इस बार देव दीपावली 5 नवंबर को मनाई जाएगी। यह देवताओं की दिवाली कहलाती है और पूरे काशी में दीपों की अनोखी जगमगाहट देखने को मिलती है। इस वर्ष देव दीपावली को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और देश के शहीदों को समर्पित किया गया है। खास बात यह है कि पहलगाम हमले में शहीद हुए 26 लोगों को भी श्रद्धांजलि दी जाएगी।

दो लाख से अधिक श्रद्धालु होंगे शामिल

गंगा आरती देखने के लिए देश-दुनिया से करीब 2 लाख लोग वाराणसी पहुंचेंगे। घाटों पर और गंगा नदी में नावों पर बैठकर श्रद्धालु आरती का दिव्य दृश्य देखेंगे। बड़ी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया है।

21 अर्चक और 42 देव-कन्याएं करेंगे महाआरती

देव दीपावली पर गंगा आरती सबसे भव्य रूप में होती है। जहां आम दिनों में 7 अर्चक आरती करते हैं, वहीं इस दिन 21 अर्चक और 42 देव-कन्याएं शामिल होंगी। देव-कन्याएं इस दौरान चंवर चलाकर आरती में भाग लेती हैं। यह दृश्य काफी मनमोहक और ऐतिहासिक माना जाता है।

पहली बार यूट्यूब पर लाइव प्रसारण

इस बार गंगा सेवा निधि द्वारा पहली बार अपने यूट्यूब चैनल से महाआरती का लाइव प्रसारण किया जाएगा, ताकि देश-विदेश के लोग घर बैठे आरती का आनंद ले सकें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ऑनलाइन देव दीपावली का दर्शन करेंगे।

गंगा आरती की शुरुआत कैसे हुई?

गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि दशाश्वमेध घाट पर पहले गंगा आरती नहीं होती थी। 1989 में उनके पिता और कुछ लोगों ने यह शुरुआत की। शुरू में सिर्फ एक अर्चक आरती करते थे, फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 3, 5 और अब 7 हो गई। आज यह परंपरा काशी की पहचान बन चुकी है।

तैयारी डेढ़ महीने पहले से

देव दीपावली की आरती के लिए तैयारी लगभग डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती है। घाटों को फूलों से सजाया जाता है और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी व्यवस्था होती है। गंगा सेवा निधि का 35 सदस्यीय दल रोज दो से ढाई घंटे तैयारी करता है। आरती रोजाना करीब एक घंटे तक चलती है।

शहीदों को नमन

हर वर्ष की तरह इस बार भी शहीद सैनिकों को सम्मान दिया जाएगा। मिश्रा ने बताया कि कारगिल विजय के बाद 1999 से शहीदों के सम्मान में आकाशदीप जलाने की परंपरा शुरू हुई थी। इस साल भी शहीद जवानों — अरविंद कुमार यादव, सुनील कुमार पांडेय, ऋतेश कुमार सिंह, इंद्रभूषण सिंह और एनडीआरएफ के जवान राम बहादुर सिंह को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

इसके साथ ही पहलगाम हमले के शहीदों को भी याद किया जाएगा।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए कड़ी सुरक्षा की गई है।

  • घाटों पर 24 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं
  • 150 वॉलंटियर और 100 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे
  • डॉक्टरों की टीम और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है
  • एनडीआरएफ की तरफ से वॉटर एम्बुलेंस भी तैनात है

25 लाख दीप जलेंगे, लेजर शो और आतिशबाज़ी

पर्यटन विभाग और देव दीपावली समिति ने शहर को रोशन करने के लिए लगभग 25 लाख दीयों का इंतजाम किया है। 20 सेक्टर बनाए गए हैं, जिनमें अलग-अलग अधिकारी तैनात रहेंगे।

शाम को 25 मिनट का 3-डी लेजर शो और काशी की कथा का प्रोजेक्शन मैपिंग शो होगा। काशी की इतिहास, गंगा की महिमा और बाबा विश्वनाथ की परंपरा दिखाई जाएगी। इसके अलावा 8 मिनट का विशेष लेजर शो और रात 8 बजे ग्रीन आतिशबाज़ी होगी।

राष्ट्रपति को भी भेजा गया निमंत्रण

गंगा सेवा निधि ने राष्ट्रपति को भी देव दीपावली में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इस आयोजन के लिए शुभकामनाएं भेजी गई हैं।

देव दीपावली: श्रद्धा, परंपरा और शौर्य का संगम

वाराणसी की देव दीपावली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, देशभक्ति और परंपरा का अनोखा संगम है। इस साल यह समारोह और भी खास रहेगा क्योंकि इसे देश की सैन्य शौर्यगाथा और शहीदों को समर्पित किया गया है। काशी, गंगा और प्रकाश की यह पावन शाम हर भक्त के लिए अविस्मरणीय होगी।

UP4India Desk
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