Tuesday, March 3, 2026
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यूपी कैबिनेट के बड़े फैसले: वृद्धावस्था पेंशन से लेकर गन्ना मूल्य वृद्धि तक कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी

राज्य सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना में बड़ा सुधार करते हुए पात्र वरिष्ठ नागरिकों के स्वतः चिन्हीकरण की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि अब ‘एक परिवार–एक पहचान’ यानी फैमिली आईडी सिस्टम के माध्यम से 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले नागरिकों की सूची तैयार होगी।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार (नवम्बर 14) को हुई कैबिनेट बैठक में कल्याणकारी योजनाओं, श्रम सुधारों, राजस्व प्रबंधन, औद्योगिक निवेश और कृषि से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी। इन फैसलों का असर राज्य के बुजुर्गों, किसानों, छोटे कारोबारियों, उद्योग जगत और सरकारी कर्मचारियों तक पर पड़ेगा। नीचे कैबिनेट के प्रमुख निर्णयों का विस्तृत विवरण दिया जा रहा है।

1. पेंशन के लिए अब अलग से आवेदन की जरूरत नहीं: फैमिली आईडी से स्वतः चयन

राज्य सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना में बड़ा सुधार करते हुए पात्र वरिष्ठ नागरिकों के स्वतः चिन्हीकरण की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि अब ‘एक परिवार–एक पहचान’ यानी फैमिली आईडी सिस्टम के माध्यम से 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले नागरिकों की सूची तैयार होगी।

इस नई व्यवस्था में:

  • जो नागरिक अगले 90 दिनों में 60 वर्ष पूरे करने वाले हैं, उनकी सूची अपने आप तैयार होगी।
  • यह सूची एपीआई के जरिए समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर भेजी जाएगी।
  • विभाग इन नागरिकों से पहले एसएमएस, व्हाट्सऐप और फोन कॉल के माध्यम से सहमति प्राप्त करेगा।
  • जो लोग डिजिटल माध्यम से सहमति नहीं देंगे, उनसे ग्राम पंचायत सहायक, सीएससी संचालक या विभागीय कर्मचारी सीधे संपर्क करेंगे।
  • यदि दोनों स्तरों पर सहमति नहीं मिलती है, तो उनका नाम सूची से हटा दिया जाएगा।

वर्तमान में 67.50 लाख लोग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं, लेकिन लाखों पात्र बुजुर्ग दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी न कर पाने की वजह से छूट जाते थे। नई व्यवस्था इस कमी को दूर करेगी।

2. रेंट एग्रीमेंट पर स्टांप शुल्क में भारी राहत, टोल और खनन पट्टे शामिल नहीं

यूपी कैबिनेट ने मानक किरायानामा विलेखों पर लगने वाले स्टांप शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कमी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे किराया समझौतों का औपचारिक रूप से पंजीकरण बढ़ेगा और किरायेदार व मकान मालिक दोनों का आर्थिक बोझ घटेगा।

मुख्य बिंदु:

  • एक वर्ष तक के किरायानामा विलेखों और 10 वर्ष की अवधि तक की रजिस्ट्री के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा तय की गई है।
  • यह छूट वार्षिक 10 लाख रुपये तक के किराये वाले समझौतों पर लागू होगी।
  • टोल पट्टों और खनन पट्टों को इस छूट से बाहर रखा गया है, क्योंकि इनसे राजस्व हानि की आशंका अधिक रहती है।

स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि यह सुधार आम जनता और व्यापारियों को राहत देगा और औपचारिक किरायेदारी व्यवस्था को बढ़ावा देगा।

3. छोटे कारोबारियों के लिए राहत: 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को पंजीयन से छूट

सरकार ने श्रम कानूनों का सरलीकरण करते हुए छोटे व्यापारियों और दुकानों को बड़ी राहत प्रदान की है। अब जिन प्रतिष्ठानों में 20 से कम कर्मचारीकार्यरत हैं, उन्हें पंजीयन करवाना अनिवार्य नहीं होगा।

पहले एक कर्मचारी वाले प्रतिष्ठान को भी पंजीयन कराना पड़ता था।

नए संशोधन के तहत:

  • अधिनियम अब केवल 20 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होगा।
  • क्लीनिक, पॉलीक्लीनिक, आर्किटेक्ट, टैक्स कंसल्टेंट, तकनीकी सलाहकार, सेवा प्रदाता, कॉर्पोरेट कार्यालय जैसे प्रतिष्ठान भी अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
  • अधिनियम की सीमा नगर क्षेत्रों से बढ़ाकर पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है।

श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि इससे छोटे व्यवसाय बिना अतिरिक्त झंझट के अपना काम कर सकेंगे, जबकि बड़े प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को सभी कानूनी लाभ मिलेंगे।

4. गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी: विभिन्न प्रजातियों के दाम में बढ़ोतरी

कैबिनेट ने गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। नए दर इस प्रकार हैं:

  • अगेती गन्ना: ₹400 प्रति क्विंटल
  • सामान्य गन्ना: ₹390 प्रति क्विंटल
  • अनुपयुक्त प्रजाति: ₹355 प्रति क्विंटल

गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया:

  • चीनी मिलों को राज्य परामर्शित मूल्य के आधार पर भुगतान करना होगा।
  • ढुलाई कटौती 60 पैसे प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर तय की गई है, जिसकी अधिकतम सीमा 12 रुपये प्रति क्विंटल होगी।
  • गन्ना समितियों व परिषदों को देय अंशदान की दर 5.50 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।

यह फैसला लाखों गन्ना किसानों को सीधी आर्थिक सहायता देगा।

5. चैनमैन को लेखपाल पद पर प्रमोशन का अवसर

प्रदेश सरकार ने पहली बार चैनमैन को लेखपाल पद पर प्रमोशन की सुविधा देने का फैसला किया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन कर दो प्रतिशत पद चैनमैन के लिए आरक्षित किए जाएंगे।

पात्रता:

  • चैनमैन का पद मूल नियुक्ति वाला होना चाहिए।
  • भर्ती वर्ष के पहले दिन तक कम से कम 6 वर्ष की सेवा पूरी होनी चाहिए।
  • न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट या समकक्ष।

प्रदेश में लेखपाल के 30,837 स्वीकृत पदों में से 8,940 पद खाली हैं। इस निर्णय से अनुभवी चैनमैन को उन्नति का अवसर मिलेगा और विभाग की क्षमता भी बढ़ेगी।

6. औद्योगिक निवेश को बढ़ावा: अशोक लीलैंड को 66 करोड़ के अतिरिक्त निवेश पर संशोधित एलओसी

कैबिनेट ने स्कूटर इंडिया की जमीन पर स्थापित अशोक लीलैंड के ईवी प्लांट में 66 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी देते हुए संशोधित लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी करने का निर्णय लिया है।

पहले कंपनी को 186 करोड़ रुपये के निवेश पर एलओसी जारी किया गया था।

नए निवेश के बाद:

  • कंपनी को मिलने वाली सब्सिडी में वृद्धि होगी।
  • राज्य में ईवी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

यह फैसला यूपी को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

7. प्लेज पार्क योजना में संशोधन: छोटे उद्यमियों के लिए जमीन तक आसान पहुंच

एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 2023 में शुरू की गई प्लेज पार्क योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

नए संशोधन:

  • अब मुख्य सड़क से 2.5 किमी भीतर भी कम से कम 15 एकड़ वाले प्लेज पार्क स्थापित किए जा सकेंगे।
  • सरकार पार्क तक सड़क और भूमि अधिग्रहण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।
  • निजी निवेशकों को 7 मीटर चौड़ी सड़क पर केवल ‘ग्रीन/ऑरेंज’ श्रेणी की इकाइयाँ स्थापित करने की अनुमति होगी, जबकि 12 मीटर सड़क पर सभी प्रकार की इकाइयाँ लग सकेंगी।
  • विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में पार्क बनने पर 25% विकास शुल्क लिया जाएगा, अन्यत्र नहीं।
  • पूरे पार्क को एक इकाई माना जाएगा, इसलिए अलग-अलग यूनिटों को अलग स्टांप शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
  • पार्क में स्थापित इकाइयों हेतु भूखंड का आवंटन जिलाधिकारी द्वारा तय समान सर्किल रेट पर होगा।
  • निवेशक पार्क की 10% भूमि पर औद्योगिक/वाणिज्यिक सुविधाएं भी विकसित करेंगे।

यह संशोधन छोटे उद्यमियों के लिए जमीन उपलब्ध कराने और औद्योगिक विकास को तेज करने के उद्देश्य से किया गया है।

8. किसानों के लिए बड़ा कदम: राज्य में लगेंगे 40,521 नए सोलर पंप

पीएम–कुसुम योजना के तहत वर्ष 2025–26 में राज्य में 40,521 सोलर पंप स्थापित किए जाएंगे। इससे सिंचाई के लिए किसानों की डीजल निर्भरता काफी कम होगी।

मुख्य बिंदु:

  • 2020–21 से अब तक 63,345 सोलर पंप लगाए जा चुके हैं।
  • इनसे 1.49 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बनी है और हर वर्ष 5,483.98 लाख यूनिट ऊर्जा की बचत हो रही है।
  • 1.26 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।
  • डीजल पंपों की जगह सोलर पंप लगने से सालाना 877.50 लाख लीटर डीजल की बचत हो रही है।
  • सरकार टेंडर मूल्य का 60% तक अनुदान देती है।
  • ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर कृषक चयन होगा और 5000 रुपये टोकन मनी जमा करनी होगी।

9. न्यायिक अधिकारियों के लिए वाहन एडवांस की सीमा बढ़ाई गई

कैबिनेट ने न्यायिक सेवा अधिकारियों को वाहन खरीदने के लिए दी जाने वाली अग्रिम राशि को 8 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है। वाहन की वास्तविक कीमत जितनी होगी, उतनी ही राशि या अधिकतम 10 लाख रुपये एडवांस मिल सकेगा।

इस पर 5% का साधारण ब्याज लागू होगा।

यह कदम अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और सुविधाओं में सुधार के उद्देश्य से उठाया गया है।

कुल मिलाकर, यूपी कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय प्रशासनिक सुधारों, सामाजिक सुरक्षा, कृषि लाभ, औद्योगिक विकास और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन कदमों से राज्य के किसानों, बुजुर्गों, उद्यमियों, कर्मचारियों और नागरिकों के विभिन्न वर्गों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

UP4India Desk
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