Tuesday, March 3, 2026
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बागपत से कजाकिस्तान तक: दादी चन्द्रो की रेंज से निकली वंशिका चौधरी ने बजाया भारत का डंका

शूटर दादी चन्द्रो की पोती और नेशनल शूटर शेफाली ने भावुक होते हुए कहा – “वंशिका ने साबित कर दिया कि दादी का सपना अब नई पीढ़ी के जरिए पूरा हो रहा है।"

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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का जौहड़ी गांव एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुर्खियों में है। कभी जहां शूटर दादियों, चन्द्रो तोमर और प्रकाशी तोमर, की बंदूक की चमक और उनके हुनर की गूंज सुनाई देती थी। उसी गांव की नई पीढ़ी ने उनकी विरासत को आगे बढ़ाया है। गांव की बेटी वंशिका चौधरी ने कजाकिस्तान में आयोजित एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का ही नहीं बल्कि अपने राज्य और गाँव का भी मान बढ़ा दिया है।

दादी चन्द्रो से मिली प्रेरणा, गांव की रेंज से शुरू हुआ सफर

वंशिका चौधरी बचपन से ही दादी चन्द्रो और प्रकाशी तोमर की जिंदादिली और संघर्ष की कहानियां सुनते हुए बड़ी हुईं। शूटर दादी का साहस और जुझारूपन उनके लिए आदर्श बना। उन्होंने गांव में दादी चन्द्रो द्वारा स्थापित शूटिंग रेंज से अपनी ट्रेनिंग शुरू की और धीरे-धीरे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह वही मजबूत नींव थी जिसने उन्हें एशियन चैंपियनशिप जैसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट तक पहुंचाया।

मेहनत रंग लाई, जीते दो-दो स्वर्ण पदक

कजाकिस्तान में आयोजित एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में वंशिका का प्रदर्शन अद्वितीय रहा। उन्होंने न केवल एक, बल्कि दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि भारत की शान का क्षण बन गई। उनके सुनहरे निशानों ने एशियाई मंच पर भारत के तिरंगे को लहराया और देश का नाम रोशन किया।

गांव में जश्न, ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत

वंशिका की जीत की खबर मिलते ही जौहड़ी गांव में हर्षोल्लास का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ इस जीत का जश्न मनाया। शूटर दादी चन्द्रो की पोती और नेशनल शूटर शेफाली ने भावुक होते हुए कहा – “वंशिका ने साबित कर दिया कि दादी का सपना अब नई पीढ़ी के जरिए पूरा हो रहा है। अगर दादी आज जीवित होतीं तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता। यह जीत दिखाती है कि हौसले बुलंद हों तो किसी भी परिस्थिति पर विजय पाई जा सकती है।”

वंशिका का अगला लक्ष्य: वर्ल्ड चैंपियनशिप

अपनी इस सफलता के बाद वंशिका चौधरी ने कहा कि उन्होंने हमेशा दादी को ही अपना आदर्श माना है। उनके सपनों को साकार करना ही उनका सबसे बड़ा मकसद रहा है। वंशिका ने कहा – “देश के लिए गोल्ड जीतना मेरे लिए गर्व का पल है, लेकिन असली चुनौती अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड दिलाना है। मेरा पूरा ध्यान आगे की तैयारी पर है।”

परंपरा और जुनून का संगम

वंशिका की यह जीत सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बागपत और जौहड़ी गांव के गौरव का प्रतीक बन गई है। यह प्रमाण है कि इस धरती पर आज भी वैसा ही जज़्बा और जुनून मौजूद है, जिसने कभी चन्द्रो और प्रकाशी तोमर जैसी हस्तियों को जन्म दिया था। अब नई पीढ़ी उसी परंपरा की मशाल थामे विश्वस्तर पर भारत का नाम रौशन कर रही है।

UP4India Desk
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