सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के पांच जिलों को दिल्ली-एनसीआर और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस योजना को ‘स्टेट कैपिटल रीजन (SCR)’ नाम दिया गया है। इसके लिए 380 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को सौंपी गई है, जिसे मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
किन जिलों को मिलाकर बनेगा SCR?
SCR योजना में लखनऊ के साथ हरदोई, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर और बाराबंकी जिलों को शामिल किया गया है। इन जिलों का कुल क्षेत्रफल करीब 27,826 वर्ग किलोमीटर है। योजना का उद्देश्य लखनऊ के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, आसपास के क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित करना और राजधानी शहर पर लगातार बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करना है।
लखनऊ के पड़ोसी जिलों की जमीन की कीमतें बढ़ जाएंगी
जिस प्रकार दिल्ली एनसीआर में शामिल शहरों के जमीन के दाम बढ़े हैं, उसी प्रकार ऐसा माना जा रहा है कि SCR योजना लागू होने के बाद उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, हरदोई और सीतापुर के जामीन के दाम में इजाफा देखने को मिलेगा. हालांकि जमीन का कितना दाम बढ़ेगा, ये आने वाला वक्त ही बताएगा.
योगी सरकार ने बनाया विकास प्राधिकरण
SCR योजना की देखरेख के लिए उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (UP SCRDA) की स्थापना की गई है। इसका मुख्यालय लखनऊ में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके अध्यक्ष और मुख्य सचिव उपाध्यक्ष होंगे। प्राधिकरण में 21 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें लोक निर्माण, नगर विकास, यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के एमडी, संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारी और सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी होंगे।
क्या-क्या होंगे प्रमुख प्रोजेक्ट?
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत लखनऊ और आसपास के जिलों को आधुनिक और स्मार्ट रीजन में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत
- मेट्रो नेटवर्क का विस्तार आस-पास के जिलों तक किया जाएगा।
- राजमार्ग और रिंग रोड को चौड़ा किया जाएगा।
- सुलभ आवास योजनाएं और स्लम पुनर्विकास होगा।
- औद्योगिक क्षेत्र और SEZ विकसित किए जाएंगे।
- स्मार्ट परिवहन जैसे इलेक्ट्रिक बसें और बीआरटीएस शुरू होंगे।
- गोमती नदी संरक्षण और जल प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा, स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप हब को बढ़ावा मिलेगा।
नागरिकों की भी होगी भागीदारी
इस प्रोजेक्ट में आम नागरिकों की राय को भी अहमियत दी जाएगी। एलडीए और SCRDA की ओर से इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल और सुझाव पेटियां जारी करने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि जनता की भागीदारी से ही यह योजना सफल हो सकेगी और लखनऊ को वैश्विक मानकों के अनुरूप एक स्मार्ट और ग्रीन सिटी में बदला जा सकेगा।




