उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन प्रयासों के अच्छे परिणाम अब राज्य में दिखाई देने लगे हैं। सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों से प्रदेश की महिलाओं को लाभ मिल रहा है।
प्रदेश में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर में 5.1 प्रतिशत अंक की कमी आई है। पहले की अपेक्षा अब कम महिलाएं खून की कमी (एनीमिया) से जूझ रही हैं। इससे महिलाओं की सेहत में सुधार हुआ है। इसका सीधा असर मां और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ा है।
मातृ मृत्युदर, शिशु मृत्युदर और नवजात मृत्युदर में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां इन कारणों से कई महिलाओं और बच्चों की जान जाती थी, अब सरकारी योजनाओं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के चलते यह संख्या काफी कम हो गई है।
सरकार ने अस्पतालों में बेहतर सुविधा, प्रसवपूर्व जांच, पोषण आहार, नियमित टीकाकरण जैसी योजनाएं चलाकर यह सफलता पाई है। साथ ही, जागरूकता अभियान भी लगातार चलाए जा रहे हैं, जिससे गांव-गांव तक मां और बच्चे की सेहत के लिए जरूरी जानकारियां पहुंच रही हैं।
महिला-पुरुष लिंगानुपात में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब प्रति 1,000 पुरुषों के मुकाबले 1,020 महिलाएं हैं। यह आंकड़ा राज्य में लिंग समानता की दिशा में बड़ा कदम है। बेटियों को जन्म देने और उनकी देखभाल को लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव आया है।
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि वे आने वाले समय में भी महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए और बेहतर योजनाएं लेकर आएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि हर महिला स्वस्थ हो और बच्चों को भी सुरक्षित जीवन मिले।
इन प्रयासों से प्रदेश में महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, जिससे समृद्ध और सुरक्षित समाज की नींव मजबूत हो रही है।




