Tuesday, March 3, 2026
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यूपी सरकार ने चकबंदी नियमों में किया बड़ा बदलाव: 75% किसानों की लिखित सहमति जरूरी

चकबंदी का उद्देश्य है किसानों की बिखरी हुई जमीन के टुकड़ों को एक जगह समेकित करना है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने चकबंदी प्रक्रिया को और पारदर्शी और किसानों के लिए लोकतांत्रिक बनाने के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियम के अनुसार, किसी भी राजस्व गाँव में चकबंदी तभी शुरू की जाएगी जब उस गाँव के कम से कम 75 प्रतिशत खाताधारक (किसान) अपनी लिखित सहमति देंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने मुख्यालय से सभी जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। योगी सरकार ने ये नया नियम लागू किया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जान लेते हैं। 

पहले की व्यवस्था 

पहले चकबंदी प्रक्रिया ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत के चुने हुए सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पास होने पर शुरू हो जाती थी। कई बार शिकायतें आती थीं कि किसानों की सहमति लिए बिना ही चकबंदी शुरू कर दी जाती थी, जिससे विवाद खड़े हो जाते थे। अब ऐसा नहीं होगा। अब चकबंदी का निर्णय गांव के अधिकांश किसानों की इच्छा के अनुरूप लिया जाएगा। 

नए नियम की आवश्यकता क्यों?

चकबंदी का उद्देश्य है किसानों की बिखरी हुई जमीन के टुकड़ों को एक जगह समेकित करना ताकि खेती आसान हो और भूमि का उपयोग बेहतर हो सके। लेकिन पहले किसानों की सहमति का सही पालन नहीं होता था, जिससे असहमति और किसानों में भरोसे की कमी हो जाती थी। नई व्यवस्था से किसानों की भागीदारी सुनिश्चित होगी और कोई विवाद या असंतोष की संभावना कम होगी।

सरकार के दिशा-निर्देश और जागरूकता अभियान

राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे चकबंदी शुरू करने से पहले किसानों की 75% लिखित सहमति सुनिश्चित करें। इसके लिए गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, किसानों को चकबंदी के लाभ समझाने और सहमति प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने के आदेश भी दिए गए हैं। साथ ही किसी भी तरह के दबाव या जबरदस्ती से बचने को कहा गया है।

विशेषज्ञों की राय

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और किसानों का विश्वास बढ़ाएगा। खासकर छोटे और सीमांत किसानों को इस प्रक्रिया में शामिल करना आवश्यक होगा, जिससे उन्हें भी इसके लाभ मिल सकें।

आखिर क्या होती है चकबंदी?

चकबंदी का मतलब है अलग-अलग जगह बंटी हुई जमीन को एक स्थान पर सामूहिक रूप से इकट्ठा करना ताकि खेती की प्रक्रिया आसान और अधिक लाभदायक हो सके। बिहार में चकबंदी की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी, लेकिन 1992 में यह बंद कर दी गई। फिर, कोर्ट के आदेश के बाद 2021 में इसे पुनः चालू किया गया। चकबंदी से जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े एक जगह जुड़ जाते हैं, जिससे किसान को तीन या ज्यादा जगहों की बजाय एक ही जगह अपनी खेती पर ध्यान केंद्रित करना संभव होता है। इससे खेती की लागत कम होती है, आधुनिक मशीनों का उपयोग आसान होता है और किसान को बेहतर उत्पादन व मुनाफा मिलता है। परिवारों के बंटवारे के कारण जो खेत छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो गए थे, उन्हें भी चकबंदी के जरिए सुधारना संभव होता है, जिससे कृषि कार्य अधिक कुशल और लाभकारी बनता है।

UP4India Desk
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