नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने वर्ष 2023 की अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी की है, जिसमें देशभर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दर्ज अपराधों का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर के मामले में तेलंगाना सबसे ऊपर है, जबकि उत्तर प्रदेश दर के लिहाज से अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता दिखा है। हालांकि, संख्या के आधार पर देखें तो राज्य में ऐसे मामलों की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद जघन्य अपराधों जैसे हत्या, लूट, डकैती और अपहरण की घटनाओं में उत्तर प्रदेश में गिरावट दर्ज की गई है, जो कानून व्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक संकेत है।
महिलाओं के साथ अपराध दर में कमी
NCRB की रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध दर में तेलंगाना (124.9 प्रति लाख महिला जनसंख्या) पहले स्थान पर है, जबकि राजस्थान (114.8), ओडिशा (112.4), हरियाणा (110.3) और केरल (86.1) इसके बाद आते हैं। उत्तर प्रदेश महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर में देशभर में 17वें स्थान पर है।
2021 से 2023 तक यूपी में महिला अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती रही। वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ 56,083 केस दर्ज हुए थे, जो 2022 में बढ़कर 65,743 और 2023 में 66,381 तक पहुंच गए। इनमें से 33 मामले सामूहिक दुष्कर्म और दुष्कर्म के बाद हत्या से जुड़े थे। वहीं, 3,556 महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले दर्ज हुए, जिनमें 301 पीड़ित नाबालिग बच्चियां थीं। इसके अतिरिक्त दुष्कर्म के प्रयास के 140 केस सामने आए।
दहेज हत्या के मामलों में 2,141 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि आत्महत्या के लिए उकसाने के 396, जबरन गर्भपात कराने के 106, एसिड अटैक के 28 और एसिड फेंकने के प्रयास के 4 मामले रिपोर्ट हुए। पति और परिजनों द्वारा मारपीट व प्रताड़ना से जुड़े 20,231 केस भी सामने आए। महिलाओं के अपहरण और बंधक बनाने की 15,074 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 10,675 अपहरण शादी के उद्देश्य से किए गए थे। इन मामलों में 3,649 पीड़िताएं 18 वर्ष से कम उम्र की थीं। इसके अलावा प्रदेश में महिला तस्करी के 7 और बच्चियों को बेचने का 1 मामला भी दर्ज हुआ।
रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह भी है कि अपराधों को दर्ज कराने में लोगों की सक्रियता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका अर्थ केवल अपराधों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन में लोगों के बढ़ते भरोसे से भी लगाया जाना चाहिए।
बच्चों से जुड़े अपराध
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों में 28वें स्थान पर रहा। 2021 में जहां 16,838 केस दर्ज हुए थे, वहीं 2022 में इसकी संख्या 18,682 और 2023 में 18,852 तक पहुंची। इसका मतलब है कि बीते वर्षों की तुलना में इसमें मामूली वृद्धि दर्ज हुई।
इन मामलों में 223 बच्चों की हत्या, 19 की बलात्कार के बाद हत्या और 17 हत्या के प्रयास शामिल हैं। बच्चों के अपहरण को लेकर भी स्थिति गंभीर रही और वर्ष 2023 में कुल 8,160 बच्चों के अपहरण दर्ज हुए। इनमें से कई मामले फिरौती और जबरन शादी कराने से जुड़े पाए गए।
हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करने पर यूपी इस श्रेणी में अन्य राज्यों से बेहतर स्थिति में दिखाई देता है। यह भी संकेत है कि राज्य ने बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ हद तक प्रभावी कदम उठाए हैं।
अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश की दिशा और योगी सरकार की रणनीति
कुल अपराध दर को देखें तो वर्ष 2023 में देशभर में आईपीसी के तहत 34,05,202 केस दर्ज हुए। इनमें से अकेले यूपी के 4,28,794 मामले थे। हालांकि, अपराध दर के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश में 20वें स्थान पर रहा। 2021 में यूपी में 3,57,505 केस और 2022 में 4,01,787 केस दर्ज किए गए थे।
सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि जघन्य अपराधों की संख्या में कमी आई है। उदाहरण के तौर पर, 2021 में हत्या, अपहरण, लूट और डकैती जैसे अपराधों की संख्या 52,505 थी, जबकि 2022 में यह 52,579 और 2023 में घटकर 49,453 रह गई।
सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार अपराध पर नियंत्रण को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पुलिस प्रशासन अपराधियों को ट्रैक करने और उन्हें जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। फॉरेंसिक साइंस, डिजिटल सर्विलांस और ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ा है, जिसका असर अपराध दर में कमी पर देखने को मिल रहा है।
राज्य सरकार का स्पष्ट मकसद यह संदेश देना है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यही वजह है कि अपराधियों पर पुलिस की सख्ती और जनता के अधिक सहयोग से उत्तर प्रदेश धीरे-धीरे अपराध मुक्त राज्य बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।




