उत्तर प्रदेश में अब औषधि निरीक्षकों को दवाओं और सिरप के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की जांच करने का अधिकार मिलेगा। अगर किसी फर्म में मिलावटी या नकली दवाएं पाई जाती हैं, तो औषधि निरीक्षक तुरंत संबंधित फर्म के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर सकेंगे। पहले यह व्यवस्था नहीं थी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने इस संबंध में सभी औषधि निरीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं।
एमपी और राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद यूपी में अलर्ट
मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित खांसी सिरप से बच्चों की मौत की खबरों के बाद उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सोमवार (6 अक्टूबर) से सभी औषधि निरीक्षकों को खांसी सिरप की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। मंगलवार को जारी निर्देश में आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने कहा कि निरीक्षण सतत और कठोर तरीके से किए जाएं।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी सलाह दी है कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी सिरप नहीं दिया जाए। मेडिकल स्टोर संचालकों को बिना डॉक्टर की पर्ची के खांसी सिरप बेचने से मना किया गया है। जो भी व्यक्ति बिना पर्ची के सिरप बेचेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सक्रिय तत्वों और निर्माण इकाइयों की जांच
डॉ. जैकब ने आगे कहा कि दवाओं में सक्रिय तत्वों (एक्टिव इंग्रेडिएंट्स) के अलावा अन्य घटक भी मिलाए जाते हैं, जो अगर दूषित हों, तो दवाएं हानिकारक साबित हो सकती हैं। इसलिए खांसी सिरप के सक्रिय तत्वों की भी जांच की जानी चाहिए।
सिरप या दवाएं बनाने वाली निर्माण इकाइयों का नियमित निरीक्षण किया जाए, और निर्माण में उपयोग होने वाले केमिकल के नमूने लेकर उनकी जांच की जाए। निरीक्षकों को इन केमिकल की खरीद के अभिलेखों की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि किसी व्यक्ति या फर्म के खिलाफ मिलावट, नकली नाम या पते के उपयोग से दवाओं की खरीद-बिक्री में संलिप्तता पाई जाती है, तो तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। एक्सपायर्ड दवाओं की बिक्री पर भी सख्त रोक लगाई गई है।
संयुक्त छापेमारी में नकली दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश
मंगलवार (7 अक्टूबर) को मादक दवाओं के दुरुपयोग की शिकायत पर औषधि विभाग, पंजाब नारकोटिक्स विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने बिरहाना रोड स्थित एक फर्म पर छापा मारा। टीम को वहां से लगभग ₹5 लाख मूल्य की नकली दवाएं बरामद हुईं।
चौंकाने वाली बात यह थी कि उसी स्थान पर दवाओं के बैच नंबर, एक्सपायरी डेट और एमआरपी के लेबल छापे जा रहे थे। टीम ने मौके से एक प्रिंटिंग मशीन और ₹29 लाख नकद बरामद किए। छापे के दौरान फर्म का निदेशक फरार हो गया।
बुखार, पेट दर्द और गैस की नकली दवाएं जब्त
जांच में पता चला कि राहुल की फर्म गैस, पेट दर्द, बुखार और एंटीबायोटिक सहित छह प्रकार की नकली दवाएं और इंजेक्शन बेच रही थी, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹5 लाख थी।
राहुल के घर के अंदर ही नकली लेबलिंग का काम चल रहा था, जहां नकली दवाओं को ब्रांडेड कंपनियों के बॉक्स में पैक किया जा रहा था। ये बॉक्स स्थानीय स्तर पर छपवाए गए थे। अधिकारियों को संदेह है कि ये दवाएं या तो कहीं और बनाई जा रही थीं या थोक में खरीदकर प्रसिद्ध दवा कंपनियों के नाम से दोबारा पैक की जा रही थीं। अधिकारियों का मानना है कि ये नकली दवाएं मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही थीं।




