उत्तर प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की खरीद पर अगले पांच वर्षों में ग्राहकों को कुल 440 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। यह उल्लेखनीय है कि पिछले तीन वर्षों में इस मद में केवल 85 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए थे। अब सरकार ने अगले दो वर्षों में 355 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित करने का लक्ष्य तय किया है। इतनी बड़ी सब्सिडी के साथ, उत्तर प्रदेश के भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन बाजार बनने की उम्मीद है। वर्तमान में राज्य देश की कुल EV बिक्री में 18% हिस्सेदारी रखता है।
EV की बिक्री के साथ-साथ निर्माण पर भी जोर
उच्च स्तरीय अधिकृत EV समिति की बैठक में न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पर बल्कि राज्य में उनके निर्माण पर भी विशेष जोर दिया गया। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन एवं गतिशीलता नीति-2022 के तहत, राज्य में पंजीकृत सभी EVs को पहले तीन वर्षों के लिए पंजीकरण शुल्क और रोड टैक्स में 100% छूट दी गई थी। यह छूट 13 अक्टूबर 2025 तक वैध है। चौथे और पांचवें वर्षों के लिए, राज्य में निर्मित और पंजीकृत वाहनों पर वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया गया है।
शून्य उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी का विस्तार
नीति को दो वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय मुख्यतः शून्य उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। भारत भर की प्रमुख EV नीतियों की समीक्षा में पाया गया कि दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्य EVs पर पंजीकरण शुल्क और रोड टैक्स में 100% छूट प्रदान कर रहे हैं। समिति ने पाया कि उत्तर प्रदेश भी अगले दो वर्षों तक 100% छूट जारी रख सकता है। इस कदम से राज्य में EV अपनाने की दर बढ़ने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश की बाजार हिस्सेदारी और EV को बढ़ावा देने की आवश्यकता
नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश ‘परफॉर्मर’ श्रेणी में आता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, राज्य ने देश की कुल EV बिक्री में 18% हिस्सेदारी दर्ज की। इस आंकड़े के आधार पर सरकार ने निष्कर्ष निकाला कि राज्य में EV स्वीकृति को और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इससे EV पारिस्थितिकी तंत्र का विकास होगा और EV के उपयोग में तेजी आएगी।
निर्माण शर्त की समाप्ति और उद्योग को आकर्षित करने के प्रयास
अन्य राज्यों के विपरीत, उत्तर प्रदेश ने अगले दो वर्षों के लिए यह शर्त हटा दी है कि सब्सिडी केवल राज्य में निर्मित वाहनों पर ही लागू होगी। इसका कारण यह है कि राज्य में अभी बड़े पैमाने पर EV निर्माण सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, सरकार ‘इन्वेस्ट यूपी’ पहल के तहत स्थापित एक समर्पित ‘ऑटो डेस्क’ के माध्यम से ऑटो कंपनियों और घटक निर्माताओं को सक्रिय रूप से आकर्षित कर रही है। जापान और जर्मनी की कंपनियों ने रुचि दिखाई है और वे जल्द ही उत्तर प्रदेश में EV निर्माण केंद्र स्थापित कर सकती हैं।
नीति के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
उत्तर प्रदेश सरकार की यह नीति पहल न केवल पर्यावरण के लिहाज से लाभकारी है, क्योंकि यह शून्य उत्सर्जन वाहनों को बढ़ावा देती है, बल्कि राज्य के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए भी लाभकारी है। सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को EV उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाना है, जिससे सतत विकास को बढ़ावा मिले और इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से बढ़ते बाजार में राज्य की मजबूत भूमिका स्थापित हो।




