संभल जिले में दशहरे के दिन प्रशासन ने बड़ा बुलडोजर एक्शन चलाया। तालाब की जमीन पर बने मैरिज हॉल और मस्जिद को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई। जहां मैरिज हॉल को प्रशासन ने खुद बुलडोजर से तोड़ा, वहीं मस्जिद को गांव वालों ने ही प्रशासन की अनुमति से हटाना शुरू कर दिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।
राया बुजुर्ग गांव में चला अभियान
यह मामला संभल मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर राया बुजुर्ग गांव का है। प्रशासन ने दावा किया कि गांव में तालाब की जमीन पर अवैध रूप से 10 साल पहले मैरिज हॉल और मस्जिद का निर्माण किया गया था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गाटा संख्या 691 तालाब के नाम से दर्ज है जिस पर मैरिज हॉल बनाया गया था, जबकि गाटा संख्या 459 खाद के गड्ढे के नाम पर दर्ज है जिस पर मस्जिद बनी थी।
30 दिनों का समय पहले ही दिया गया था
संभल एसपी केके बिश्नोई ने बताया कि यह पूरी तरह अवैध कब्जा था। प्रशासन ने पहले ही 30 दिन का समय मस्जिद व मैरिज हॉल के संचालकों को दिया था। इसके बाद भी जब अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो गुरुवार को कार्रवाई की गई। तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि 2 सितंबर को नोटिस जारी हुआ था। मालगुजारी रिकॉर्ड और राजस्व विभाग की जांच में यह निर्माण अवैध पाया गया और अब विध्वंस की कार्यवाही की गई।
और पढ़ें: संभल में सरकारी जमीन पर मदरसे और मस्जिद बना कर अवैध कब्जा: प्रशासन ने हटाने का दिया अल्टीमेटम
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती
कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने इलाके को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया। करीब 200 पुलिसकर्मी और पीएसी जवान तैनात रहे। 4 थानों के थाना इंचार्ज, सीओ, एसडीएम और ASP उत्तरी कुलदीप सिंह खुद मौके पर मौजूद रहे। 15 एसआई और 40 से अधिक पुलिसकर्मियों को बुलडोजर एक्शन की निगरानी के लिए लगाया गया। ड्रोन कैमरों से लगातार पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
मैरिज हॉल ढहाया, मस्जिद खुद हटाने के लिए आगे आए लोग
गुरुवार सुबह पांच बुलडोजर लगाकर 30 हजार वर्ग फीट में बने मैरिज हॉल को तोड़ा गया। पहले दीवारों को गिराया गया, फिर छत को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके पास बनी 550 वर्ग फीट में बनी मस्जिद को प्रशासन भी गिराना चाहता था। लेकिन जैसे ही मैरिज हॉल पर बुलडोजर चला, गांव वाले मस्जिद को खुद ही तोड़ने के लिए आगे आ गए।
मस्जिद कमेटी के लोगों ने डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी बिश्नोई से मिलकर अनुमति मांगी और चार दिन के भीतर मस्जिद को पूरी तरह हटाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने इसके दीवारें तोड़ना शुरू भी कर दिया है।
ग्रामीणों का सहयोग और माहौल
गांव के मोहम्मद अंसार ने बुलडोजर कार्रवाई के बीच पुलिस टीम को चाय पिलाई। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद और मैरिज हॉल सरकारी जमीन पर बने थे। उन्होंने स्वीकार किया कि मैरिज हॉल ग्रामीणों के पैसे से बना था लेकिन इसमें किसी भी कार्यक्रम के लिए शुल्क नहीं लिया जाता था।
गांव के ही जीशान ने बताया कि डीएम ने उन्हें 4 दिन का समय दिया है और इस दौरान गांव वाले मस्जिद को पूरी तरह गिरा देंगे। खास बात यह रही कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद किसी भी तरह का विरोध-प्रदर्शन या विवाद सामने नहीं आया।
दस साल पहले हुआ था निर्माण
तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि करीब एक दशक पहले गांव के ही मिंजार नामक व्यक्ति ने यह मैरिज हॉल और मस्जिद बनवाए थे। बकौल तहसीलदार, वही मस्जिद का मौलाना भी है और दोनों परिसरों की देखरेख उन्हीं के जिम्मे थी। प्रशासनिक सर्वे के दौरान खुलासा हुआ कि यह निर्माण तालाब और खाद गड्ढे की जमीन पर ही किया गया है। इसके बाद राजस्व विभाग ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर धारा 67 के तहत कार्रवाई की और नोटिस जारी किया था।
प्रशासन का रुख स्पष्ट
एसडीएम विकास चंद्र ने कहा कि दोनों स्थलों पर अवैध कब्जे का कोई भी साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका। मिंजार ने बेदखली आदेश पर आपत्ति दाखिल की थी, लेकिन जब दस्तावेज नहीं दिखा पाए तो प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी।
इस मामले में प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर बसा कोई भी अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि दशहरे के दिन भी बड़ी कार्रवाई कर तालाब की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।




